कानूनी चिंताओं के चलते ईयू सांसदों ने मर्कोसुर व्यापार समझौते को रोकने के पक्ष में मतदान किया

ब्रुसेल्स, 21 जनवरी (एपी): यूरोपीय संघ (ईयू) के सांसदों ने बुधवार को दक्षिण अमेरिकी देशों के मर्कोसुर समूह के साथ हुए एक बड़े मुक्त व्यापार समझौते के अनुमोदन (रतिफिकेशन) को कानूनी चिंताओं के चलते रोकने के पक्ष में मतदान किया।

फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में हुए मतदान में सांसदों ने मामूली अंतर से ईयू–मर्कोसुर समझौते को यूरोप की सर्वोच्च अदालत भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दी, ताकि यह तय किया जा सके कि यह समझौता यूरोपीय संघ की संधियों के अनुरूप है या नहीं। मतदान का परिणाम 334 मत पक्ष में, 324 विरोध में और 11 सांसदों के तटस्थ रहने के रूप में आया।

अब जब तक यूरोपीय न्यायालय (European Court of Justice) इस पर फैसला नहीं सुना देता, तब तक संसद इस समझौते को मंजूरी देने के लिए मतदान नहीं कर सकती। इस प्रक्रिया में कई महीने लग सकते हैं।

यह लंबे समय से प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता शनिवार को प्रभावी रूप से हस्ताक्षरित हुआ था। करीब 25 वर्षों की बातचीत के बाद तैयार इस समझौते का उद्देश्य दुनिया भर में बढ़ते संरक्षणवाद और व्यापारिक तनावों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना था।

इस समझौते को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक माना जा रहा था। उन्होंने 9 जनवरी को ईयू के 27 नेताओं के बीच हुए एक अहम मतदान में इसे आगे बढ़ाया था। दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान उन्होंने कहा, “दुनिया भर में हमारे जितने अधिक व्यापारिक साझेदार होंगे, हम उतने ही अधिक स्वतंत्र होंगे,” और मर्कोसुर के साथ-साथ भारत के साथ प्रस्तावित एक अन्य व्यापार समझौते की ओर भी इशारा किया।

दक्षिण अमेरिका के पशुपालन प्रधान देशों और यूरोप के औद्योगिक हितों द्वारा समर्थित यह समझौता अर्जेंटीना के गोमांस से लेकर जर्मन कारों तक, 90 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर शुल्क को धीरे-धीरे समाप्त करने का लक्ष्य रखता है। इससे दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार क्षेत्रों में से एक का निर्माण होगा और 70 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं के लिए वस्तुएं सस्ती होंगी।

यूरोप के प्रमुख कृषि उत्पादक देश फ्रांस ने किसानों के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों की मांग की थी और इस समझौते में देरी चाही थी। फ्रांस के विदेश मंत्री जां-नोएल बारो ने संसद के इस फैसले का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया पर कहा कि संसद ने “उस रुख के अनुरूप अपनी बात रखी है, जिसका हमने बचाव किया है। फ्रांस जब जरूरत होती है, तब ‘ना’ कहने की जिम्मेदारी लेता है, और इतिहास अक्सर इसे सही साबित करता है। संघर्ष जारी रहेगा।”

यूरोपीय आयोग ने हालांकि संसद के इस फैसले पर “गहरा खेद” जताया है।

इसके बावजूद, ईयू की शक्तिशाली कार्यकारी शाखा इस समझौते को अस्थायी रूप से लागू कर सकती है। ईयू नेता गुरुवार को ट्रांस-अटलांटिक संबंधों पर केंद्रित एक आपात शिखर सम्मेलन में आगे की रणनीति पर चर्चा करने वाले हैं।

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने सोशल मीडिया पोस्ट में ईयू संसद के फैसले को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया। उन्होंने लिखा, “यह भू-राजनीतिक स्थिति का गलत आकलन करता है। हम समझौते की वैधता को लेकर आश्वस्त हैं। अब और देरी नहीं होनी चाहिए। समझौते को तुरंत अस्थायी रूप से लागू किया जाना चाहिए।”

यूरोपीय संसद की व्यापार समिति के अध्यक्ष बर्न्ड लांगे ने इस मतदान को “पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना” और “हमारे आर्थिक हितों के लिए बेहद नुकसानदायक” बताया। उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले सांसदों को कानूनी समीक्षा की आड़ में देरी करने के बजाय सीधे अनुमोदन के खिलाफ मतदान करना चाहिए था।

दक्षिण अमेरिका में इस समझौते के अनुमोदन को लगभग तय माना जा रहा है, क्योंकि वहां इसे व्यापक समर्थन प्राप्त है।

मर्कोसुर में क्षेत्र की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अर्जेंटीना और ब्राजील, साथ ही पराग्वे और उरुग्वे शामिल हैं। ब्लॉक का सबसे नया सदस्य बोलीविया इस व्यापार समझौते में शामिल नहीं है, लेकिन आने वाले वर्षों में शामिल हो सकता है। वेनेजुएला को मर्कोसुर से निलंबित कर दिया गया है और वह भी इस समझौते का हिस्सा नहीं है।

(एपी)

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