किसी भी गलती की संभावना को न्यूनतम करना हमारा प्रयास होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

New Delhi: Security heightened outside the Supreme Court, in New Delhi, Monday, Jan. 5, 2026. Supreme Court on Monday refused to grant bail to activists Umar Khalid and Sharjeel Imam in the 2020 Delhi riots conspiracy matter, saying there was a prima facie case against them under the Unlawful Activities (Prevention) Act. (PTI Photo/Atul Yadav)(PTI01_05_2026_000101B)

नई दिल्ली, 12 फरवरी (पीटीआई) सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत होने के नाते हमारा प्रयास यह होना चाहिए कि किसी भी ऐसी गलती की संभावना को न्यूनतम किया जाए, जिसका राष्ट्र के विकास और पर्यावरण पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली शामिल थे, ने यह भी आगाह किया कि न्यायिक प्रणाली में अनिश्चितता या अप्रत्याशितता का संदेश नहीं जाना चाहिए।

यह टिप्पणी तब आई जब शीर्ष अदालत परियोजनाओं को पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) से पर्यावरणीय मंजूरी देने के मुद्दे से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “हमें पूरे देश पर इसके प्रभाव और परिणामों को भी देखना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय में हमें किसी भी ऐसी गलती की संभावना को कम से कम करना चाहिए, जिसका विकास, राष्ट्र की प्रगति या पर्यावरण पर दूरगामी और विनाशकारी प्रभाव हो सकता है।”

पिछले वर्ष 18 नवंबर को अपने ही फैसले को पलटते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और अन्य प्राधिकरणों को भारी जुर्माने के भुगतान पर पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने वाली परियोजनाओं को पूर्व प्रभाव से मंजूरी देने का रास्ता साफ किया था। अदालत ने कहा था कि अन्यथा “हजारों करोड़ रुपये व्यर्थ चले जाएंगे।”

शीर्ष अदालत ने 2:1 के बहुमत से कहा था कि यदि 16 मई 2025 के फैसले को वापस नहीं लिया गया, जिसमें केंद्र को पूर्व प्रभाव से पर्यावरणीय मंजूरी देने से रोका गया था, तो लगभग 20,000 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि से बनी अनेक महत्वपूर्ण सार्वजनिक परियोजनाओं को ध्वस्त करना पड़ेगा।

गुरुवार की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने समीक्षा याचिका पर दिए गए नवंबर के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि तीन न्यायाधीशों की पीठ ने मामले के गुण-दोष पर कुछ निष्कर्ष दिए थे।

उन्होंने कहा कि मई का पूर्व निर्णय दो-न्यायाधीशों की पीठ ने दिया था।

इस पर पीठ ने कहा, “किसी भी हितधारक के मन में यह गलत धारणा नहीं जानी चाहिए कि अदालत आदेश पारित करते समय सभी पहलुओं पर विचार नहीं करती। समीक्षा याचिका पर एक निर्णय दिया गया है। उस पीठ ने विस्तृत सुनवाई की और अपना दृष्टिकोण अपनाया। हमें उस दृष्टिकोण का भी सम्मान करना चाहिए।”

पीठ ने कहा कि यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि न्यायिक प्रणाली में पूर्वानुमेयता या स्थिरता का अभाव है या अदालतें असंगत हैं।

कुछ अधिवक्ताओं ने इस मामले में दायर अंतरिम आवेदनों का भी उल्लेख किया।

पीठ ने कहा कि वह सोमवार को मामले सहित सभी आवेदनों पर सुनवाई करेगी।

गौरतलब है कि 16 मई को दो-न्यायाधीशों की पीठ ने अपने फैसले में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा संबंधित प्राधिकरणों को पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने वाली परियोजनाओं को पूर्व प्रभाव से पर्यावरणीय मंजूरी देने से रोक दिया था। PTI ABA MNL RHL