
श्री विजयपुरम, 16 जनवरी (पीटीआई) केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह 17 जनवरी को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह पहुंचेंगे और राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी) का दौरा करेंगे। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह श्री विजयपुरम के डॉलीगंज स्थित अटल सेंटर फॉर ओशन साइंस एंड टेक्नोलॉजी फॉर आइलैंड्स में खुले समुद्र में ट्यूना, कॉड और स्नैपर जैसी समुद्री फिन फिश के पायलट स्तर पर पालन तथा समुद्री शैवाल (सीवीड) की खेती से संबंधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की समीक्षा करेंगे।
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में 1,48,000 टन समुद्री संसाधनों के दोहन की क्षमता है, जबकि वर्तमान में वार्षिक समुद्री पकड़ 49,138 टन है। ट्यूना के मामले में वर्तमान समुद्री पकड़ 4,420 टन है, जबकि वास्तविक क्षमता प्रति वर्ष 60,000 टन ट्यूना की है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “केंद्रीय मंत्री को यह दिखाया जाएगा कि समुद्री फिन फिश की समुद्री पकड़ को कैसे बढ़ाया जा सकता है।”
एनआईओटी के दौरे के अलावा केंद्रीय मंत्री द्वीपसमूह में समुद्री शैवाल की खेती की सुविधाओं का भी जायजा लेंगे।
समुद्री शैवाल का उपयोग सौंदर्य प्रसाधन, दवाइयां, खाद्य पदार्थ और रंगों सहित विभिन्न उत्पादों के निर्माण में किया जाता है।
एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने कहा, “अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में समुद्री शैवाल की 100 वंशों से संबंधित 244 प्रजातियां उपलब्ध हैं। इनमें से लगभग 58 प्रकार के समुद्री शैवाल को अत्यंत उपयोगी और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य माना गया है। यह मछुआरों के लिए आजीविका का एक वैकल्पिक स्रोत प्रदान करेगा।
“इसके अलावा, समुद्री शैवाल का विपणन और व्यापार हमारे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में भी महत्वपूर्ण मूल्यवर्धन कर सकता है। इसमें आवश्यक पोषक तत्व होते हैं, जो कैंसर, आंतरिक संक्रमण, मधुमेह, गठिया, हृदय रोग आदि से लड़ने में मदद करते हैं।”
2020 में (2025 तक पांच वर्षों के लिए) सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत समुद्री शैवाल की खेती को बढ़ावा देने के लिए 640 करोड़ रुपये विशेष रूप से आवंटित किए थे, जिसका लक्ष्य 2025 तक 11.2 लाख टन से अधिक उत्पादन करना था। पीएमएमएसवाई का उद्देश्य आगामी पांच वर्षों (लक्ष्य वर्ष 2030) में समुद्री शैवाल उत्पादन को 1.12 मिलियन टन तक बढ़ाना है।
इसके बाद राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी) के शोधकर्ता उन्हें ‘समुद्रयान मिशन’—भारत के पहले मानवयुक्त गहरे समुद्र अन्वेषण—में अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के महत्व के बारे में भी जानकारी देंगे, जो भारत की ‘ब्लू इकोनॉमी’ को बढ़ावा देगा।
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का समुद्र पॉलीमेटालिक नोड्यूल्स से समृद्ध है और गहरे समुद्र में अन्वेषण से इन नोड्यूल्स के दोहन में मदद मिलेगी। ये मैंगनीज, निकल, तांबा, कोबाल्ट आदि जैसे आवश्यक धातुओं के निष्कर्षण के लिए अत्यंत मूल्यवान हैं। ये इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों और नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण घटक हैं।
2024 में, समुद्रयान मिशन के संसाधन आकलन प्रयासों के तहत, अंडमान सागर में लगभग 1,200 मीटर की गहराई से 100 किलोग्राम से अधिक कोबाल्ट-समृद्ध पॉलीमेटालिक नोड्यूल्स सफलतापूर्वक एकत्र किए गए थे।
उनके साथ पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डी. राजेश गोखले और एनआईओटी के निदेशक प्रो. बालाजी रामकृष्णन भी होंगे।
पीटीआई SN RG
