केंद्र ने एसडब्ल्यूएम नियम 2026 लागू किए; 1 अप्रैल से अनुपालन अनिवार्य

New Delhi: Union Minister for Environment, Forest and Climate Change Bhupender Yadav addresses a press conference, at Indira Paryavaran Bhawan, in New Delhi, Monday, Dec. 22, 2025. (PTI Photo/Salman Ali)(PTI12_22_2025_000222B)

नई दिल्ली, 29 जनवरी (पीटीआई) केंद्र सरकार ने नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management–SWM) नियमों को अधिसूचित कर दिया है, जिनके तहत स्रोत पर ही ठोस कचरे का चार श्रेणियों में पृथक्करण अनिवार्य कर दिया गया है और बल्क वेस्ट जनरेटर्स की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय की गई हैं।

कचरे के पृथक्करण की चार श्रेणियां होंगी—गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी कचरा और विशेष देखभाल वाला कचरा।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बुधवार को बताया कि ये नए नियम 1 अप्रैल से प्रभावी होंगे।

नए नियमों के अनुसार, जिन संस्थानों का निर्मित क्षेत्रफल 20,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक है, या जिनकी जल खपत 40,000 लीटर प्रतिदिन या उससे अधिक है, या जो प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करते हैं, उन्हें ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ की श्रेणी में रखा गया है।

इस श्रेणी में केंद्र और राज्य सरकार के विभाग, स्थानीय निकाय, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, संस्थान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और आवासीय सोसायटियां शामिल हैं।

इन सभी इकाइयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके द्वारा उत्पन्न कचरे का संग्रह, परिवहन और निपटान पर्यावरण के अनुकूल तरीके से नियमों के अनुरूप किया जाए। इस प्रावधान से शहरी स्थानीय निकायों पर बोझ कम होने और विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

नियमों में स्थानीय निकायों के उपनियमों के अनुसार कचरा उत्पन्न करने वालों पर उपयोगकर्ता शुल्क लगाने का भी प्रावधान किया गया है।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया, “संशोधित नियमों में सर्कुलर इकॉनमी और एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी के सिद्धांतों को शामिल किया गया है, जिसमें प्रभावी कचरा पृथक्करण और प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया है।”

बयान में यह भी कहा गया कि नियमों के उल्लंघन पर ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ के तहत पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाए जाने का प्रावधान है, जिसमें बिना पंजीकरण संचालन, गलत रिपोर्टिंग, जाली दस्तावेज जमा करना या ठोस कचरा प्रबंधन में लापरवाही जैसे मामले शामिल हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) आवश्यक दिशानिर्देश तैयार करेगा, जबकि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रदूषण नियंत्रण समितियां पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाएंगी।

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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