तिरुवनंतपुरम, 10 अक्टूबर (पीटीआई) — मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा है कि केरल केंद्रीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 में संशोधन करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
केरल विधानसभा ने बुधवार को यह विधेयक पारित किया, जिसका उद्देश्य राज्य में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम करना है।
मुख्यमंत्री ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि केरल वन्यजीव संरक्षण (संशोधन) विधेयक का पारित होना बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्षों से निपटने और वन किनारे रहने वाले समुदायों को न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
उन्होंने लिखा, “ये सुधार मानव जीवन और वन्यजीव दोनों की रक्षा करने के लिए केरल की प्रतिबद्धता को दोहराते हैं तथा लोगों और प्रकृति के बीच सामंजस्य को प्रोत्साहित करते हैं।”
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह विधेयक राजभवन को भेजा जाएगा, जो इसे राष्ट्रपति के पास अग्रेषित करेगा, क्योंकि यह एक केंद्रीय कानून से संबंधित है।
यह विधेयक पिछले महीने विधानसभा में पेश किया गया था।
राज्य के वन मंत्री ए. के. ससीन्द्रन ने एक दिन पहले विधानसभा में बताया था कि केंद्र से समय पर संशोधन की अनुमति नहीं मिलने के कारण राज्य सरकार को स्वयं अपना संशोधन विधेयक लाना पड़ा।
उन्होंने कहा था कि मानव-वन्यजीव संघर्ष राज्य की एक-तिहाई आबादी के जीवन को सीधे प्रभावित करने वाला मुद्दा है।
मंत्री ने यह भी कहा कि इस संशोधन विधेयक का मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार को वन्यजीवों को ‘हानिकारक जीव’ (वर्मिन) घोषित करने का अधिकार देना और आवश्यक परिस्थितियों में हस्तक्षेप करने की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है।
पीटीआई
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