
नई दिल्ली, 6 फरवरी (पीटीआई)
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को राज्यसभा में लिखित उत्तर में कहा कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा बढ़ाने के लिए कोचों में सुधार एक निरंतर प्रक्रिया है और कोचों का प्रतिस्थापन उनकी स्थिति या निर्धारित (कोडल) आयु पूरी होने के आधार पर किया जाता है।
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सांसद अब्दुल वहाब ने केरल में ट्रेनों के कोचों की खराब स्थिति को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि इससे यात्रियों को असुविधा और सुरक्षा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
वहाब ने पूछा कि क्या मंत्रालय केरल में चलने वाली प्रमुख ट्रेनों—जैसे इंटरसिटी, परशुराम, वेनाड, मेमू, मालाबार, राजा रानी, नेत्रावती और अन्य प्रमुख सेवाओं—में लगाए गए कोचों के निर्माण वर्ष और वर्तमान आयु का विवरण देगा। उन्होंने यह भी जानकारी मांगी कि पुराने कोचों को बदलने के लिए कोई समयबद्ध योजना है या नहीं और कोच प्रतिस्थापन में देरी की जिम्मेदारी किसकी होगी।
वैष्णव ने कहा, “भारतीय रेल में यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और आराम बढ़ाने के लिए रोलिंग स्टॉक का सुधार/उन्नयन एक सतत और जारी प्रक्रिया है। कोचों का प्रतिस्थापन/मरम्मत उनकी स्थिति, कोडल आयु की समाप्ति आदि के आधार पर किया जाता है।”
उन्होंने कहा कि भारतीय रेल ने तकनीकी रूप से उन्नत एलएचबी (LHB) कोचों को बड़े पैमाने पर शामिल किया है, जिनमें बेहतर राइडिंग, उन्नत सौंदर्य, हल्का डिजाइन, एंटी-क्लाइंबिंग फीचर्स, फेल्योर इंडिकेशन सिस्टम के साथ एयर सस्पेंशन (सेकेंडरी), स्टेनलेस स्टील शेल और डिस्क ब्रेक सिस्टम जैसी सुविधाएं हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 2004-14 की तुलना में 2014-25 के दौरान एलएचबी कोचों के उत्पादन में 18 गुना वृद्धि हुई है।
वैष्णव ने कहा, “केरल दक्षिण रेलवे के अंतर्गत आता है, जहां 57 जोड़ी ट्रेन सेवाओं को पहले ही एलएचबी कोचों में परिवर्तित किया जा चुका है।”
(पीटीआई)
