
नई दिल्ली, 29 दिसंबर (पीटीआई) — राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने सोमवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में लगे बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की विभिन्न राज्यों में हुई मौतों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा तंज कसा। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर एक कथित “घुसपैठिया” अस्वीकार्य है, तो फिर 33 बीएलओ की मौतें क्या स्वीकार्य हैं।
सिब्बल की यह प्रतिक्रिया पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में एक बीएलओ के मृत पाए जाने के एक दिन बाद आई। इस घटना के बाद आरोप लगे कि चल रहे एसआईआर अभियान से जुड़ा कार्य दबाव उनकी मौत की वजह हो सकता है। सिब्बल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “बंगाल में एक और बीएलओ की आत्महत्या। पूरे देश में अब तक 33। अगर एक कथित ‘घुसपैठिया’ ठीक नहीं है, तो क्या 33 बीएलओ की मौतें ठीक हैं?”
गौरतलब है कि पिछले महीने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि सरकार देश से घुसपैठियों को बाहर करेगी और आरोप लगाया था कि कुछ राजनीतिक दल एसआईआर का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे चाहते हैं कि घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में बने रहें।
बीएलओ की ताजा मौत पश्चिम बंगाल के रानीबंध प्रखंड में हुई, जहां रविवार सुबह एक स्कूल परिसर से हराधन मंडल का शव बरामद किया गया। पुलिस के अनुसार, मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है। मंडल एक स्कूल शिक्षक थे और रानीबंध प्रखंड के राजकाटा क्षेत्र के बूथ संख्या 206 के बीएलओ के रूप में कार्यरत थे।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि मृतक के हस्ताक्षर वाला एक नोट बरामद हुआ है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर बीएलओ के रूप में काम के दबाव को संभाल पाने में असमर्थता का जिक्र किया है।
विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में बीएलओ की भूमिका अहम होती है। चुनाव आयोग ने पहले चरण में बिहार में एसआईआर कराया था, जबकि दूसरे चरण में यह प्रक्रिया 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जारी है। पीटीआई
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