
नई दिल्ली, 16 जनवरी (पीटीआई) दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि वर्ष 2025 में शहर में हुए 2,000 से अधिक सड़क हादसों में 649 पैदल यात्रियों की जान गई, जबकि 1,738 लोग घायल हुए। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि पैदल चलने वाले यात्री दिल्ली की सड़कों पर कितने असुरक्षित हैं।
ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, पैदल यात्रियों की मौत से जुड़े लगभग आधे मामलों में—771 हादसों में हुई 330 मौतों में—शामिल वाहन की पहचान नहीं हो सकी।
निजी कारें दूसरे सबसे बड़े कारण के रूप में सामने आईं। 477 हादसों में निजी कारों से 92 पैदल यात्रियों की मौत हुई। इसके बाद दोपहिया वाहन रहे, जो 472 हादसों में शामिल थे और जिनमें 75 पैदल यात्रियों की जान गई।
भारी वाहन भी पैदल यात्रियों के लिए बड़ा खतरा साबित हुए। मालवाहक वाहनों से जुड़े 87 हादसों में 43 लोगों की मौत हुई, जबकि टेम्पो 80 हादसों में शामिल रहे, जिनमें 25 मौतें दर्ज की गईं।
आंकड़ों के अनुसार, गैर-डीटीसी बसों से जुड़े हादसों में 15 पैदल यात्रियों की मौत हुई, जबकि डीटीसी बसों से जुड़े मामलों में यह संख्या नौ रही।
अधिकारियों ने बताया कि पैदल यात्रियों से जुड़े साधारण चोट वाले हादसों की संख्या 1,546 थी, जबकि घातक हादसे 646 रहे। वर्ष 2025 में कुल 2,192 हादसों में पैदल यात्री घायल या मृत हुए।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “ये आंकड़े पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर बेहतर प्रवर्तन, बुनियादी ढांचे और जागरूकता को प्राथमिकता देने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।”
अधिकारियों के अनुसार, तेज रफ्तार, खराब लेन अनुशासन और रास्ता न देने की प्रवृत्ति के कारण पैदल यात्री सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं।
ये आंकड़े ऐसे समय साझा किए गए हैं, जब दिल्ली ट्रैफिक पुलिस राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत एक माह का वॉकथॉन आयोजित कर रही है, जिसका उद्देश्य सड़क अनुशासन और सुरक्षित व्यवहार के प्रति जागरूकता फैलाना है, जिसमें पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इस वॉकथॉन में करीब 2,000 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें स्कूल और कॉलेज के छात्र, एनसीसी कैडेट्स, स्वयंसेवक और विभिन्न संगठनों व कॉरपोरेट्स के प्रतिनिधि शामिल थे। दिल्ली में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 1 जनवरी से 31 जनवरी तक मनाया जा रहा है।
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