
अहमदाबाद, 9 जनवरी (PTI) — केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने शुक्रवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए खदानों को चालू करने में लगने वाले समय को कम करना बेहद जरूरी है। उन्होंने राज्यों से घरेलू मांग को पूरा करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक कचरे से महत्वपूर्ण खनिजों के निष्कर्षण पर विशेष ध्यान देने का भी आग्रह किया।
रेड्डी गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर – 2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी मौजूद थे।
उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर खनन पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से बदल रहा है और शहरी खनन (Urban Mining) में अपार संभावनाएं हैं।
“आज खनन क्षेत्र केवल औद्योगिक विकास का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह भारत की भू-राजनीतिक शक्ति, रणनीतिक सुरक्षा और वैश्विक प्रभाव की मजबूत नींव बन चुका है,” रेड्डी ने कहा।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, तेजी से बदलती खनन भू-राजनीति, महत्वपूर्ण खनिजों पर बढ़ता फोकस, नई तकनीकों का आगमन, सतत विकास लक्ष्य और प्रतिस्पर्धी बाजारों के चलते खनन क्षेत्र एक गतिशील दौर से गुजर रहा है।
रेड्डी ने कहा कि भारत को खनन क्षेत्र को 360 डिग्री दृष्टिकोण से देखना होगा और केवल खनन तक सीमित न रहकर रिफाइनिंग, रीसाइक्लिंग और पुनः प्रसंस्करण सहित पूरी मूल्य श्रृंखला पर ध्यान देना होगा।
उन्होंने राज्यों और खनन एवं भूविज्ञान से जुड़े विभागों से आपसी समन्वय के साथ काम कर खनन मूल्य श्रृंखला को अधिक कुशल बनाने का आह्वान किया।
“हमें अगली पीढ़ी की तकनीकों को अपनाकर अन्वेषण (एक्सप्लोरेशन) की गति बढ़ानी होगी। मंजूरियों में लगने वाला समय कम किया जाना चाहिए और खदानों का संचालन जल्द से जल्द शुरू होना चाहिए। असम में एक खदान केवल नौ महीनों में शुरू की गई — हमें इसी तरह की गति और दक्षता अपनानी होगी,” उन्होंने कहा।
रेड्डी ने बताया कि नीलामी के बाद किसी खदान को चालू होने में आमतौर पर पांच से सात साल लग जाते हैं।
“इसलिए जरूरी है कि अन्वेषण, मंजूरी, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास नीति और संचालन — सभी प्रक्रियाओं को एक साथ योजना बनाकर न्यूनतम समय में पूरा किया जाए,” उन्होंने कहा।
खनन क्षेत्र के जीडीपी में योगदान को बढ़ाने के लिए मंत्री ने तकनीकी उन्नयन, कुशल मानव संसाधन और अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर विशेष जोर देने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक हालात, आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों और महत्वपूर्ण खनिजों की बढ़ती मांग के बीच शहरी खनन और वेस्ट-टू-वेल्थ (कचरे से संपदा) दृष्टिकोण अब हकीकत बन चुके हैं।
“कचरा डंप और फ्लाई ऐश से खनिज निकालने के नए अवसर सामने आ रहे हैं। राज्यों को नवीनतम तकनीकों का उपयोग कर शहरी खनन के जरिए महत्वपूर्ण खनिजों के निष्कर्षण पर काम करना चाहिए,” रेड्डी ने कहा।
उन्होंने भरोसा जताया कि भारत पुराने मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की रीसाइक्लिंग के माध्यम से महत्वपूर्ण खनिजों की बड़ी मांग पूरी कर सकता है।
रेड्डी ने बताया कि इस वर्ष शहरी खनन और रीसाइक्लिंग उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक रीसाइक्लिंग प्रोत्साहन योजना शुरू की गई है।
“केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और तकनीकी साझेदारों को मिलकर इस योजना का पूरा लाभ उठाना चाहिए। मजबूत प्रबंधन, उन्नत रीसाइक्लिंग तकनीक, कुशल मानव संसाधन, अंतर-मंत्रालयी समन्वय और एकीकृत नीति ढांचे के जरिए शहरी खनन को बड़े पैमाने पर बढ़ाया जा सकता है,” उन्होंने कहा।
रेड्डी ने कहा कि आने वाले वर्षों में डिजिटलाइजेशन और डेटा-आधारित निर्णय खनन क्षेत्र की दिशा तय करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाते हुए नीति सुधारों और तकनीकी विकास के माध्यम से खुद को एक मजबूत खनन शक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है।
“पिछले 11 वर्षों में खनन क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति और सुधार हुए हैं। 2014 की तुलना में अन्वेषण में लगभग 190 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और खनिज उत्पादन में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है,” रेड्डी ने कहा।
खनन मंत्रालय द्वारा आयोजित इस चिंतन शिविर का उद्देश्य खनन क्षेत्र से जुड़े प्रमुख नियामक और विकासात्मक मुद्दों पर संरचित विचार-विमर्श करना और केंद्र व राज्यों के बीच समन्वय को और मजबूत करना है।
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