‘खराब पड़ोसियों’ के खिलाफ अपने लोगों की रक्षा करने का भारत को पूरा अधिकार है: जयशंकर

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this screengrab from a video released by PMO on May 10, 2025, Union External Affairs Minister S Jaishankar during a meeting chaired by Prime Minister Narendra Modi at the latter’s residence, after the announcement of ceasefire between India and Pakistan, in New Delhi. (PMO via PTI Photo) (PTI05_10_2025_000329B)

चेन्नई, 2 जनवरी (PTI) — केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि “खराब पड़ोसियों” से निपटते समय भारत को अपने नागरिकों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है और किसी पड़ोसी देश द्वारा आतंकवाद को प्रायोजित करते हुए भारत से पानी साझा करने की मांग नहीं की जा सकती।

पाकिस्तान का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, “जब बात ऐसे खराब पड़ोसियों की हो जो लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं, तो भारत को अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है और वह जो भी जरूरी होगा, करेगा। आप हमसे पानी साझा करने की मांग भी नहीं कर सकते और साथ ही हमारे देश में आतंकवाद भी फैला सकते हैं।”

साथ ही, जयशंकर ने “अच्छे पड़ोसियों” के प्रति भारत के सहयोगी रुख को रेखांकित किया। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान वैक्सीन आपूर्ति, यूक्रेन युद्ध के समय ईंधन और खाद्य सहायता, और श्रीलंका के वित्तीय संकट के दौरान 4 अरब अमेरिकी डॉलर की मदद का उल्लेख किया।

आईआईटी मद्रास में बोलते हुए उन्होंने भारत के इरादों को गलत तरीके से समझे जाने से बचाने के लिए संवाद के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “यदि आप स्पष्ट, ईमानदार और प्रभावी ढंग से संवाद करते हैं, तो अन्य देश और लोग उसका सम्मान करते हैं और उसे स्वीकार करते हैं।”

भारत की विशिष्ट सभ्यतागत विरासत पर विचार करते हुए उन्होंने कहा, “बहुत कम प्राचीन सभ्यताएं हैं जो आज के प्रमुख आधुनिक राष्ट्र-राज्य के रूप में जीवित हैं, और हम उनमें से एक हैं… लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था को अपनाने का हमारा निर्णय ही लोकतंत्र को एक सार्वभौमिक अवधारणा बनाने वाला बना। पश्चिम के साथ साझेदारी भी महत्वपूर्ण है, और इसी के माध्यम से हम विश्व को आकार देते हैं।”

जयशंकर ने ‘आईआईटीएम ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन’ का भी शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य आईआईटी मद्रास को शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के लिए एक वैश्विक नेटवर्क वाले केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

उन्होंने आगे कहा, “देश घरेलू स्तर पर मजबूत होकर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़कर आगे बढ़ते हैं। सीमित संसाधनों में अधिकतम प्रभाव कैसे डाला जाए—आज की भारतीय विदेश नीति इसी समस्या का समाधान हमारी प्रतिस्पर्धात्मकता, ताकतों और अन्य संस्थानों के जरिए खोजने का प्रयास करती है।”

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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