गाज़ा योजना से जुड़ी ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की शुरुआत के लिए ट्रंप डावोस पहुंचे

President Donald Trump, right, meets with NATO Secretary General Mark Rutte during a meeting on the sidelines of the Annual Meeting of the World Economic Forum in Davos, Switzerland, Wednesday, Jan. 21, 2026. (AP/PTI) (AP01_22_2026_000001B)

डावोस, 22 जनवरी (AP): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्विट्ज़रलैंड के डावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान अपने अंतरराष्ट्रीय मंच ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की शुरुआत करने पहुंचे हैं। इस अवसर पर एक दर्जन से अधिक देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और शीर्ष राजनयिक मौजूद हैं। फोरम के कार्यक्रम के अनुसार, भाग लेने वाले देशों की सूची में मध्य पूर्व और दक्षिण अमेरिका के देशों का वर्चस्व है, जबकि यूरोप के प्रमुख अमेरिकी सहयोगी अपेक्षाकृत कम दिखते हैं और बोर्ड की पूरी सदस्यता अभी स्पष्ट नहीं है। ट्रंप के साथ विदेश मंत्री मार्को रूबियो और अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ भी हैं।

डावोस में ट्रंप के ग्रीनलैंड को लेकर एक दिन पहले लिए गए नाटकीय यू-टर्न के बाद यूरोप ने राहत की सांस ली है। ट्रंप ने आठ यूरोपीय देशों पर ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण के लिए दबाव बनाने हेतु लगाए जाने वाले टैरिफ को वापस ले लिया।

‘बोर्ड ऑफ पीस’ के उद्घाटन भाषण में ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र का उल्लेख करते हुए कहा कि इस निकाय की स्थापना में “कई देशों” की भागीदारी रही है और अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सहित अन्य संगठनों के साथ काम करेगा। यह उल्लेख इसलिए भी अहम है क्योंकि ट्रंप पहले संयुक्त राष्ट्र की आलोचना कर चुके हैं और अमेरिका को कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकाल चुके हैं। हाल के दिनों में उन्होंने संकेत दिए हैं कि यह नया मंच अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका की बराबरी कर सकता है।

डावोस में प्रदर्शित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का लोगो उत्तर अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों पर केंद्रित दिखा। शुरुआत में ट्रंप ने इसे गाज़ा शांति प्रक्रिया से जोड़कर पेश किया था, लेकिन बाद में इसके दायरे को अन्य वैश्विक संघर्षों की मध्यस्थता तक विस्तारित करने की बात कही। ट्रंप प्रशासन ने पश्चिमी गोलार्ध पर विशेष जोर देते हुए अपनी नीति को “डोनरो डॉक्ट्रिन” नाम दिया है, जो मुनरो डॉक्ट्रिन का संदर्भ है।

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिख मर्ज़ ने डेनमार्क, ग्रीनलैंड और अमेरिका के बीच वार्ता का समर्थन करते हुए डेनिश संप्रभुता की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि सही दिशा में कदम बढ़ रहे हैं और ट्रंप की हालिया टिप्पणियों का स्वागत किया।

‘बोर्ड ऑफ पीस’ के अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में ट्रंप के साथ उनके दामाद जैरेड कुश्नर, विदेश मंत्री मार्को रूबियो और दूत स्टीव विटकॉफ शामिल हैं। कुश्नर और विटकॉफ हाल के वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं के केंद्र में रहे हैं, खासकर मध्य पूर्व में।

इस मंच के शुभारंभ में शामिल होने वाले नेताओं में अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, पराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्ज़ियोयेव, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ, आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान और अज़रबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव शामिल हैं। पशिनयान और अलीयेव ने पिछले वर्ष व्हाइट हाउस में एक शांति समझौता किया था। सऊदी अरब, बहरीन, तुर्की और मोरक्को के मंत्री और राजनयिक भी कार्यक्रम में मौजूद हैं।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की भी डावोस पहुंचे हैं और ट्रंप से मुलाकात करने वाले हैं। वह “यूक्रेन की पुनर्निर्माण प्रक्रिया के लिए अंतरराष्ट्रीय सलाहकार परिषद” पर एक पैनल चर्चा में भाग लेंगे और ऊर्जा कंपनियों के प्रतिनिधियों से भी मिलेंगे।

इस बीच, तकनीकी उद्योगपति एलन मस्क भी गुरुवार को डावोस में एक नए सत्र में बोलेंगे। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अनुसार, स्विस आल्प्स में यह उनका पहला दौरा होगा। उनका संबोधन ब्लैकरॉक के सीईओ लॉरेंस फिंक के साथ बातचीत के रूप में होगा।

नाटो प्रमुख मार्क रुटे ने ग्रीनलैंड को लेकर हालिया तनाव के बाद सहयोगियों से अपील की कि वे यूक्रेन को प्राथमिकता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि रूस अब भी यूक्रेन पर ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहा है, इसलिए “यूक्रेन पर ध्यान केंद्रित रखना बेहद ज़रूरी है।”

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