चिराग ने बिहार के मद्यनिषेध कानून की समीक्षा की मांग की।

Ranchi: Union Minister Chirag Paswan being welcomed by supporters upon his arrival at the Birsa Munda Airport, in Ranchi, Jharkhand, Saturday, Feb. 28, 2026. (PTI Photo) (PTI03_01_2026_000023B)

पटना, 2 मार्च (पीटीआई) — केंद्रीय मंत्री Chirag Paswan ने बिहार के दशक पुराने शराबबंदी कानून की समीक्षा की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इसके क्रियान्वयन को मजबूत बनाने के लिए कमियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जाना चाहिए।

रविवार को पटना में संवाददाताओं से बात करते हुए पासवान ने कहा कि यह आकलन किया जाना चाहिए कि जिस उद्देश्य से कानून लागू किया गया था, क्या वह पूरा हो रहा है या नहीं।

उन्होंने कहा, “यह समीक्षा करने की जरूरत है कि जिन उद्देश्यों के साथ यह कानून लागू किया गया था, वे पूरे हो रहे हैं या नहीं। अगर नहीं हो रहे हैं तो खामियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जाना चाहिए।”

पासवान ने स्पष्ट किया कि समीक्षा की मांग को शराबबंदी हटाने की वकालत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “जब हम समीक्षा की बात करते हैं तो अक्सर यह गलतफहमी होती है कि हम शराबबंदी हटाने की बात कर रहे हैं। मेरा मानना है कि किसी भी योजना को समय के साथ बेहतर बनाने के लिए उसकी लगातार समीक्षा जरूरी है।”

Lok Janshakti Party (Ram Vilas) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पासवान ने कहा कि वह नशाखोरी पर रोक लगाने के प्रयासों का पूरी तरह समर्थन करते हैं, क्योंकि लत का परिवारों और समाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने याद दिलाया कि जब Janata Dal (United) की सरकार, जिसका नेतृत्व Nitish Kumar कर रहे थे, ने शराबबंदी लागू की थी, तब उनकी पार्टी विपक्ष में होने के बावजूद इस कदम का समर्थन किया था।

उन्होंने कहा, “शराब के सेवन और निर्माण पर रोक लगाने का विचार सामाजिक रूप से उचित है।”

हालांकि, पासवान ने राज्य में जहरीली शराब के सेवन से होने वाली बार-बार की मौतों और शराब की कथित ‘होम डिलीवरी’ के आरोपों का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा, “समय-समय पर जहरीली शराब से मौतों की खबरें आती रहती हैं। अगर ऐसी घटनाएं अभी भी हो रही हैं, तो इसका मतलब है कि कहीं न कहीं जहरीली शराब का निर्माण हो रहा है।”

पासवान ने कहा कि इन चिंताओं को देखते हुए कानून के प्रवर्तन तंत्र की व्यापक समीक्षा आवश्यक है, ताकि कमियों को दूर कर इसके इच्छित प्रभाव को सुनिश्चित किया जा सके।

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान एलजेपी (आरवी) के विधायक माधव आनंद ने भी शराबबंदी नीति की समीक्षा की मांग की थी। जहां जेडीयू नेताओं ने कानून पर पुनर्विचार से इनकार किया है, वहीं भाजपा की ओर से अब तक मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। (पीटीआई) SUK SOM ACD

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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