चीन का जापान पर दबाव एक परिचित रणनीति है, जो कुछ समय तक जारी रह सकती है

FILE - Japan's Internal Affairs Minister Sanae Takaichi, center, arrives at the prime minister's official residence in Tokyo, Aug. 3, 2016. AP/PTI(AP10_21_2025_000055B)

बीजिंग, 26 नवम्बर (एपी) चीन द्वारा जापान की यात्रा न करने की सलाह जारी करने के कुछ ही दिनों बाद रद्दीकरण शुरू हो गए।

टोक्यो के ऐतिहासिक आसाकुसा जिले की एक गली में स्थित री टाकेडा के टीरूम में हर साल लगभग 3,000 चीनी पर्यटक आते हैं। इनमें से करीब 200 लोग जनवरी तक की उनकी चाय समारोह कक्षा की बुकिंग रद्द कर चुके हैं।

उन्होंने कहा, “मुझे सिर्फ उम्मीद है कि चीनी नववर्ष तक चीनी पर्यटक वापस आ जाएंगे।” हालांकि पिछले अनुभव बताते हैं कि इसमें अधिक समय लग सकता है।

जापान की नई प्रधानमंत्री के ताइवान मुद्दे पर दिए बयान को वापस लेने से इनकार करने पर अपनी नाराजगी जताने के लिए चीन अपनी पुरानी रणनीति अपना रहा है।

जैसे उसने 2020 में ऑस्ट्रेलियाई वाइन पर टैरिफ लगाया था और 2012 में फिलीपींस के केले के आयात पर प्रतिबंध लगाया था, उसी तरह वह अपनी आर्थिक ताकत का इस्तेमाल कर टोक्यो पर दबाव डाल रहा है और साथ ही जापानी सरकार पर शब्दों के तीखे हमले भी कर रहा है। अब सवाल यह है कि चीन इस बार कितनी दूर तक जाएगा और उसके कदम कितने समय तक चलेंगे।

थीसिंगुआ विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर लियू जियांगयोंग ने कहा, “चीन की प्रतिरोधी कार्रवाइयाँ गुप्त रखी जाती हैं और एक-एक करके लागू की जाती हैं। क्योंकि यह राष्ट्र के मूल हितों का मामला है, इसलिए कुछ भी संभव है।”

विवाद एक साल से अधिक खिंच सकते हैं

चीन को जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के उस बयान से नाराज़गी हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि चीन ताइवान के खिलाफ कोई कार्रवाई करता है, तो जापानी सेना शामिल हो सकती है।

जापान झगड़े को बढ़ने से रोकने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसने पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दिया है। यह वही रुख है जो अन्य कई देशों ने चीन के दबाव के समय अपनाया — अपने रुख पर कायम रहें और नुकसान सहते हुए विवाद को महीनों या सालों तक चलने दें।

काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस की वरिष्ठ फेलो शीला ए. स्मिथ ने कहा, “दोनों देशों के लिए कूटनीतिक चुनौती यह है कि उन्हें अपने घरेलू दर्शकों को भी ध्यान में रखना होता है और वे पीछे हटते हुए नहीं दिखना चाहते।”

कई मामलों में विवाद तब तक चले जब तक राजनीतिक बदलाव नहीं आया और नए नेता ने पिछले बयानों के दबाव के बिना रिश्तों को सुधारने का रास्ता नहीं बनाया।

2012 में फिलीपींस जैसे देशों के साथ विवाद के बाद और ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापारिक तनातनी में, स्थिति नए नेताओं के आने के बाद धीरे-धीरे सामान्य हुई। कनाडा में भी नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के आने के बाद संबंध बेहतर होने शुरू हुए हैं।

यात्रा सलाह का असर

यह पहली बार नहीं है जब जापान को चीन के आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ा है। 2012 में दोनों देशों के बीच विवाद बढ़ने पर चीन में जापानी व्यवसायों पर हमले हुए और उनके उत्पादों का बहिष्कार किया गया। जापान के लिए ग्रुप टूर रद्द हुए।

नोमुरा रिसर्च इंस्टीट्यूट के अर्थशास्त्री ताकाहिदे किउची के अनुसार, उस समय चीनी पर्यटकों की संख्या एक-चौथाई तक गिर गई थी। उनके अनुमान के अनुसार, मौजूदा यात्रा सलाह के कारण जापान को लगभग 1.8 ट्रिलियन येन (11.5 अरब डॉलर) का नुकसान हो सकता है और उसकी पहले से कम आर्थिक वृद्धि में 0.3 प्रतिशत अंक की गिरावट आ सकती है।

कई व्यवसायों को पहले ही इसका असर दिखने लगा है। आइची प्रिफेक्चर के गामागोरी होटल ने बताया कि उसके 2,000 से अधिक चीनी मेहमानों ने बुकिंग रद्द कर दी है। चीनी पर्यटकों पर केंद्रित जापानी टूर कंपनी Nichu Syomu ने 300 रद्दीकरण की सूचना दी और इसे 2012 जैसा ही नुकसान बताया।

कुछ चीनी पर्यटक रद्द कर रहे हैं, कुछ नहीं

बीजिंग की किरन झू, जिन्होंने पहले कभी जापान नहीं देखा था, निर्णय लेने में उलझ गईं। उनके माता-पिता ने जाने से मना किया। अंत में उन्होंने पत्तझड़ देखने का अपना जापान दौरा रद्द कर दिया, लेकिन उनकी मित्र गई और बोली कि सब सामान्य था।

झू ने कहा, “अगर मुझे पता होता, तो शायद मैं चली जाती। लेकिन यह कहना मुश्किल है। स्थिति हमारे नियंत्रण से बाहर है।”

उधर, उत्तरी जापान में स्की लॉज चलाने वाली बीजिंग की निवासिनी लिविया डू के पास दो रद्दीकरण आए, लेकिन वे तुरंत अन्य चीनी ग्राहकों से भर गए।

कुछ ग्राहकों ने कहा कि चीन ने स्पष्ट रुख अपनाया है, इसलिए उन्हें भी उसका पालन करना होगा। एक ग्राहक ने बताया कि उसकी सरकारी कंपनी ने कर्मचारियों को फिलहाल जापान न जाने के निर्देश दिए हैं।

डू ने कहा कि ग्राहक इंतज़ार कर रहे हैं कि स्थिति कैसे विकसित होती है। उन्हें चिंता थी कि हालात और बिगड़ सकते हैं।

चीन और कदम उठाने की चेतावनी देता है

दबाव पिछले सप्ताह अन्य क्षेत्रों तक भी फैलता दिखा। दो जापानी फिल्मों की चीन में रिलीज अचानक स्थगित कर दी गई — “Cells at Work!” और “Crayon Shin-chan the Movie: Super Hot! The Spicy Kasukabe Dancers”। शंघाई में एक कॉमेडी फेस्टिवल ने जापानी कंपनी के शो रद्द किए। एक प्रकाशन संपादक ने बताया कि उनके बॉस ने जापानी कॉमिक बुक के आयात प्रोजेक्ट को रोकने को कहा है।

जापानी समुद्री खाद्य उत्पादों के निर्यात का भविष्य भी अस्पष्ट है, हालांकि जापान ने उन रिपोर्टों से इनकार किया है जिनमें कहा गया था कि चीन दो साल से लगे प्रतिबंध को हटाने वाला है। (एपी)