
नई दिल्ली, 31 दिसंबर (पीटीआई) कांग्रेस ने बुधवार को भारत और पाकिस्तान के बीच कथित मध्यस्थता को लेकर चीन के दावों को चिंताजनक बताया और कहा कि इस मुद्दे पर देश की जनता को स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस दावे पर चुप्पी तोड़ने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसे दावे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा का मज़ाक बनाते प्रतीत होते हैं।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “राष्ट्रपति ट्रंप लंबे समय से यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने 10 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोकने के लिए व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया था। वह यह दावा कम से कम सात देशों में विभिन्न मंचों पर 65 बार कर चुके हैं। प्रधानमंत्री ने अपने तथाकथित अच्छे मित्र द्वारा किए गए इन दावों पर कभी चुप्पी नहीं तोड़ी।”
उन्होंने कहा, “अब चीन के विदेश मंत्री भी ऐसा ही दावा कर रहे हैं और कह रहे हैं कि चीन ने भी मध्यस्थता की। 4 जुलाई 2025 को उप सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत वास्तव में चीन का भी सामना कर रहा था।”
रमेश ने कहा कि जब चीन स्पष्ट रूप से पाकिस्तान के पक्ष में खड़ा था, तब भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के उसके दावे बेहद चिंताजनक हैं। “ये दावे न केवल अब तक जनता को जो बताया गया है, उसके विपरीत हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मज़ाक बनाते प्रतीत होते हैं,” उन्होंने कहा।
उन्होंने कहा कि इस दावे को चीन के साथ भारत के रिश्तों के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। “हमने चीन के साथ फिर से संवाद शुरू किया है, लेकिन दुर्भाग्य से यह संवाद चीनी शर्तों पर हुआ है। 19 जून 2020 को प्रधानमंत्री द्वारा चीन को दी गई ‘क्लीन चिट’ ने भारत की सौदेबाजी की स्थिति को काफी कमजोर कर दिया,” उन्होंने कहा।
कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर है और देश का बड़ा निर्यात चीन से आयात पर निर्भर है।
उन्होंने आरोप लगाया कि “अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन की उकसाने वाली गतिविधियां लगातार जारी हैं।”
रमेश ने कहा, “इतने असंतुलित और शत्रुतापूर्ण संबंधों के बीच, देश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि ऑपरेशन सिंदूर को अचानक रोकने में चीन की क्या भूमिका रही।”
गौरतलब है कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को कहा था कि इस वर्ष चीन ने जिन ‘हॉट इश्यूज’ में मध्यस्थता की, उनमें भारत-पाकिस्तान तनाव भी शामिल है।
हालांकि, नई दिल्ली लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि 7 से 10 मई के बीच भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ संघर्ष दोनों देशों के डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस) के बीच सीधे संवाद के जरिए सुलझा था। भारत यह भी दोहराता रहा है कि भारत-पाकिस्तान मामलों में किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की कोई जगह नहीं है।
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