नई दिल्ली, 12 जनवरी (पीटीआई) – प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार के दौरान छत्तीसगढ़ में कथित अवैध कोयला लेवी घोटाले से जुटाए गए 540 करोड़ रुपये के “वसूली” पैसे का एक हिस्सा चुनावी खर्चों और राजनेताओं व अधिकारियों को “घूस” देने में इस्तेमाल किया गया।
फेडरल जांच एजेंसी ने बयान में कहा कि धन शोधन मामले की जांच के तहत, उसने छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री कार्यालय में उप सचिव रहे निलंबित राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी सौम्या चौरसिया और एक अन्य व्यक्ति की कुल 2.66 करोड़ रुपये की संपत्ति को अटैच किया है।
अटैच की गई संपत्तियों में आठ अचल संपत्तियां, जमीन के टुकड़े और आवासीय फ्लैट शामिल हैं। ईडी ने बताया कि ये संपत्तियां आरोपी–चौरसिया और निखिल चंद्राकर– द्वारा अपने रिश्तेदारों के नाम से अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई थीं।
एजेंसी के अनुसार, यह मामला जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच कोयला परिवहनकर्ताओं से प्रति टन 25 रुपये वसूलने के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोग से बनाए गए कथित “रैकेट” से संबंधित है। इस सिंडिकेट ने कथित तौर पर 540 करोड़ रुपये “अवैध रूप से” जुटाए।
ईडी का आरोप है कि यह वसूला गया पैसा सरकारी अधिकारियों और राजनेताओं को घूस देने, चुनावी खर्चों को वित्तपोषित करने और चल और अचल संपत्तियों को खरीदने में इस्तेमाल हुआ।
चौरसिया, जो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार में प्रभावशाली अधिकारी मानी जाती थीं, और दस अन्य को ईडी ने गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई।
अब तक इस मामले में एजेंसी ने पांच चार्जशीट दायर की हैं, जिनमें 35 व्यक्तियों और कंपनियों को नामित किया गया है।
यह धन शोधन मामला 2022 में बेंगलुरु पुलिस द्वारा दर्ज FIR, 2023 में आयकर विभाग की चार्जशीट और 2024 में छत्तीसगढ़ इकोनॉमिक ऑफेंस विंग/एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB) की शिकायत पर आधारित है।
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