रायगढ़ (छत्तीसगढ़), 2 जनवरी (PTI) – छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में खनन विरोधी प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर तैनात एक महिला कांस्टेबल के साथ मारपीट और कपड़े फाड़े जाने का एक बेहद परेशान करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिससे व्यापक आक्रोश फैल गया है।
पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि इस मामले में अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है और घटना में शामिल अन्य लोगों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।
यह घटना 27 दिसंबर को तमनार ब्लॉक में हुई थी, जब 14 गांवों के लोगों द्वारा एक कोयला खनन परियोजना के खिलाफ किया जा रहा विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया।
पुलिस के अनुसार, भीड़ के बीच खेत में अकेली रह गई महिला कांस्टेबल के साथ मारपीट की गई।
गुरुवार को सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कांस्टेबल जमीन पर पड़ी हुई रोती-बिलखती नजर आती है और हाथ जोड़कर रहम की गुहार लगाती है, जबकि दो लोग उसके कपड़े फाड़ते हुए वहां मौजूद होने को लेकर उससे सवाल करते हैं।
वीडियो में वह लगातार रोते हुए कहती सुनाई देती है,
“मत फाड़ो भाई। मैं कुछ नहीं करूंगी। मैंने किसी को नहीं मारा।”
एक आरोपी उसके फटे कपड़े खींचता दिखता है, जबकि दूसरा व्यक्ति पूरी घटना का वीडियो बनाता है और बाद में चप्पल दिखाकर उसे धमकाता और चिल्लाता है।
बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक संजीव शुक्ला ने बताया कि कथित रूप से छेड़छाड़ में शामिल दो स्थानीय निवासियों को गिरफ्तार किया गया है। उनके बयानों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है।
उन्होंने कहा कि आरोपियों पर छेड़छाड़, हत्या के प्रयास, लूट और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है।
शुक्रवार को ऑल इंडिया महिला कांग्रेस ने फेसबुक पर इस घटना का धुंधला (ब्लर) वीडियो साझा किया।
पोस्ट में कहा गया,
“छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एक महिला पुलिस कांस्टेबल के साथ मारपीट और उसके कपड़े फाड़े जाने का वीडियो बेहद भयावह है। अगर महिला पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की क्या उम्मीद की जा सकती है? यह साफ है कि डबल इंजन की भाजपा सरकार महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर पूरी तरह विफल रही है।”
राज्य कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने इस घटना को भयावह और शर्मनाक बताया और कहा कि सरकार को यह आत्ममंथन करना चाहिए कि जनता में पुलिस और प्रशासन के खिलाफ गुस्सा क्यों बढ़ रहा है।
उन्होंने दावा किया कि लोग व्यवस्था से विश्वास खोते जा रहे हैं।
पिछले सप्ताह लिब्रा गांव के पास पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच झड़पें हुई थीं। स्थानीय लोग 12 दिसंबर से जिंदल पावर लिमिटेड को आवंटित गारे पेलमा सेक्टर-1 कोयला ब्लॉक के लिए हुई जनसुनवाई को रद्द करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
ग्रामीणों को आशंका है कि खनन से उनकी आजीविका प्रभावित होगी, समुदाय विस्थापित होगा और अन्य समस्याएं पैदा होंगी।
प्रदर्शनकारियों द्वारा कथित रूप से पथराव किए जाने से दो अधिकारियों समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
भीड़ ने एक पुलिस बस, एक जीप और एक एंबुलेंस को आग के हवाले कर दिया, साथ ही कई अन्य सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाया।
प्रदर्शनकारियों ने लिब्रा गांव के पास स्थित जिंदल पावर के कोयला हैंडलिंग प्लांट में भी घुसकर कन्वेयर बेल्ट, दो ट्रैक्टर और अन्य वाहनों को आग लगा दी, तथा कार्यालय परिसर में तोड़फोड़ की।
ग्रामीणों का दावा है कि हालात तब बिगड़े जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को धरना स्थल से हटाने की कोशिश की।
हिंसा के दौरान महिलाओं के एक समूह ने कथित रूप से तमनार थाना प्रभारी कमला पूसम पर भी हमला किया, जिससे उन्हें चोटें आईं।
हिंसा के एक दिन बाद रायगढ़ प्रशासन ने कहा कि उसने परियोजना के लिए हुई जनसुनवाई को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़
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