
जगदलपुर (छत्तीसगढ़), 17 अक्टूबर (पीटीआई) — छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में शुक्रवार को 210 माओवादी कैडर, जिनमें एक केंद्रीय समिति सदस्य भी शामिल है, ने आत्मसमर्पण किया। अधिकारियों ने बताया कि यह राज्य के नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास का सबसे बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण है।
इससे पहले बुधवार को 28 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था, जिसके साथ पिछले तीन दिनों में कुल 238 नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट आए हैं।
मुख्यमंत्री विश्वेश्वर देव साई ने इस मौके को “न केवल बस्तर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए ऐतिहासिक दिन” बताया।
अधिकारियों के अनुसार, यह सामूहिक आत्मसमर्पण राज्य में चल रहे वामपंथी उग्रवाद समाप्ति अभियान में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ है।
जगदलपुर में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादी कैडरों का स्वागत आदिवासी समुदाय के नेताओं और पुजारियों ने लाल गुलाब देकर किया, जो प्यार, शांति और नई शुरुआत का प्रतीक है।
इसके बाद आत्मसमर्पण करने वाले कैडर, वरिष्ठ पुलिस और सुरक्षा अधिकारी तथा आदिवासी समुदाय के नेता मंच पर साथ में फोटो खिंचवाते नजर आए।
मंच के पीछे लगे बैनर पर लिखा था — “पूना मार्गेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन – माओवादी कैडर मुख्यधारा में शामिल।”
पूना मार्गेम बस्तर रेंज पुलिस की नक्सलियों के पुनर्वास की पहल है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री साई ने कहा, “आज 210 भाई-बहनों ने जो समाज से भटके हुए थे, उन्होंने संविधान, महात्मा गांधी के दिखाए अहिंसा के मार्ग और राज्य की पुनर्वास नीति में विश्वास जताते हुए मुख्यधारा में वापसी की है।”
उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों में शीर्ष स्तर से लेकर निचले स्तर तक के सदस्य शामिल हैं।
राज्य की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति में आर्थिक सहायता, भूमि लाभ, औद्योगिक नीति में विशेष लाभ और रोजगार से जुड़ाव जैसी कई सुविधाएं दी गई हैं।
मुख्यमंत्री ने इसे केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त रणनीति का परिणाम बताया, जिसमें पुलिस, सुरक्षा बलों, स्थानीय प्रशासन और जागरूक समुदायों की सक्रिय भागीदारी रही है।
आत्मसमर्पण करने वाले प्रमुख माओवादी नेताओं में शामिल हैं —
रूपेश उर्फ सतीश (केंद्रीय समिति सदस्य),
भास्कर उर्फ राजमन मंडावी, रनिता, राजू सलाम, धन्नू वेट्टी उर्फ संतू (सभी दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति सदस्य) और रतन एलम (क्षेत्रीय समिति सदस्य)।
माओवादियों ने कुल 153 हथियार सौंपे, जिनमें 19 एके-47 राइफल, 17 एसएलआर, 23 इंसास राइफल, 1 एलएमजी, 36 .303 राइफल, 4 कार्बाइन और 11 बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (BGL) शामिल हैं।
इससे पहले, 2 अक्टूबर को 103 नक्सलियों ने बीजापुर जिले में आत्मसमर्पण किया था, जिनमें से 49 पर कुल ₹1.06 करोड़ का इनाम घोषित था।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही यह दोहरा चुके हैं कि सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करना है।
गुरुवार को शाह ने घोषणा की थी कि छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर क्षेत्र अब नक्सल आतंक से मुक्त हैं।
उन्होंने कहा कि जो आत्मसमर्पण करना चाहते हैं उनका स्वागत है, लेकिन जो बंदूक उठाए रखेंगे, उन्हें सुरक्षा बलों का सामना करना पड़ेगा।
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