
नई दिल्ली, 22 अगस्त (भाषा) सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों के विस्थापन पर अपने पूर्व निर्देश में संशोधन करने के बाद शुक्रवार को जंतर मंतर पर पशु प्रेमी जश्न में झूम उठे। अदालत ने कहा कि केवल रेबीजग्रस्त या आक्रामक कुत्तों को ही शेल्टर होम भेजा जाएगा।
तीन जजों की पीठ ने कहा कि स्वस्थ आवारा कुत्तों का नसबंदीकरण और टीकाकरण कर उन्हें उनकी मूल जगह पर ही छोड़ा जाए, जैसा कि पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियम, 2023 में प्रावधान है। साथ ही नगर निकायों को हर वार्ड में कुत्तों की संख्या के अनुसार निर्धारित फीडिंग जोन बनाने का निर्देश दिया।
फैसले के तुरंत बाद वहां मौजूद कार्यकर्ताओं और देखभाल करने वालों ने एक-दूसरे को गले लगाया और नारे लगाए। कई लोगों ने “हर हर महादेव” बोलकर भगवान का शुक्रिया अदा किया।
कई लोगों ने इस फैसले को “दया की जीत” बताया।
एक जश्न मनाने वाले ने कहा, “अब हमें अपने बच्चों को कहीं भेजने की ज़रूरत नहीं है। यह ऐतिहासिक दिन है। अदालत ने समुदाय के जानवरों की देखभाल का सही तरीका मान्यता दी है। हमारे स्ट्रीट किड्स हमारे साथ रहेंगे और हम उनकी देखभाल जारी रखेंगे।”
एक अन्य कार्यकर्ता ने कहा कि यह निर्णय उन सभी के लिए “असीम राहत” लेकर आया है जो आवारा कुत्तों से गहरा लगाव रखते हैं।
उन्होंने कहा, “हम बहुत चिंतित थे, लेकिन आज के फैसले से उम्मीद मिली है कि दया और विज्ञान साथ-साथ चलेंगे।”
11 अगस्त को आए अदालत के पिछले आदेश में सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर में भेजने का निर्देश दिया गया था, जिससे पशु कल्याण समूह चिंतित थे क्योंकि इसके लिए पर्याप्त ढांचा मौजूद नहीं है। आज का फैसला उनके लिए बड़ी राहत लेकर आया।
पीटा इंडिया (PETA India) ने फैसले का स्वागत किया और अधिकारियों से पर्याप्त फीडिंग ज़ोन बनाने की अपील की। साथ ही लोगों को गोद लेने को बढ़ावा देने और पालतू खरीदने से बचने की सलाह दी।
पीटा ने कहा, “हर कुत्ते का भी दिन आता है और आज वह दिन है — चाहे वह चाय की दुकान का शेरू हो, मंदिर की सीढ़ियों पर बैठी रानी हो या सोसायटी के मैदान में घूमता मोती।”
संगठन ने यह भी आगाह किया कि नागरिक यह सुनिश्चित करें कि किसी भी समुदाय के कुत्ते को गलत तरीके से “आक्रामक” बताकर हटाया न जाए।
ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया की प्रबंध निदेशक आलोकपर्णा सेंगुप्ता ने भी फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि नसबंदी और टीकाकरण ही जनसंख्या नियंत्रण का सबसे स्थायी और मानवीय तरीका है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि असली चुनौती नगर निकायों द्वारा निर्देशों को सही ढंग से लागू करना होगा, जिसके लिए ढांचा और जवाबदेही दोनों जरूरी हैं।
जंतर मंतर पर कई लोगों के लिए यह जश्न भावुक भी हो गया।
देखभाल करने वाली मेघना सिंह की आंखों में खुशी के आंसू थे। उन्होंने कहा, “कल रात से मैं बहुत चिंतित थी, लेकिन आज ये केवल खुशी के आंसू हैं। अब मुझे एहसास हुआ कि कितने लोग इन स्ट्रीट डॉग्स के साथ खड़े हैं और उन्हें प्यार करते हैं।”
यह फैसला पशु कल्याण समूहों के लिए बड़ी राहत साबित हुआ, जिन्होंने पहले के आदेश का विरोध किया था और तर्क दिया था कि सभी कुत्तों को शेल्टर में रखना संभव नहीं है।
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