
पुरी, 28 दिसंबर (पीटीआई): पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में रखे आभूषणों और बहुमूल्य वस्तुओं की सूची (इन्वेंट्री) की निगरानी के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति ने शनिवार को इनकी गिनती के लिए एक नए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पर विचार-विमर्श शुरू किया।
न्यायमूर्ति बिस्वनाथ रथ की अध्यक्षता में हुई समिति की पहली बैठक चार घंटे से अधिक समय तक चली। इसमें सुरक्षा व्यवस्था और 12वीं सदी के इस मंदिर में निर्बाध अनुष्ठानों को सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया, यह जानकारी श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरविंद पाधी ने दी।
पाधी ने कहा, “समिति ने अभी तक भौतिक रूप से आभूषणों और बहुमूल्य वस्तुओं की गणना शुरू करने की कोई तारीख तय नहीं की है। नया एसओपी राज्य सरकार द्वारा 13 जुलाई 2024 और 12 अगस्त 2024 को रत्न भंडार को खोलने और उसकी मरम्मत के लिए तय पुराने एसओपी के आधार पर तैयार किया जा रहा है। इस नए एसओपी को मंजूरी के लिए श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (एसजेटीएमसी) को भेजा जाएगा।”
एसजेटीए के मुख्य प्रशासक ने बताया कि मसौदा एसओपी के अनुसार, इन्वेंट्री के दौरान और उसके बाद रत्न भंडार में प्रवेश और निकास करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की उचित जांच और स्क्रीनिंग की जाएगी। एसओपी के सही क्रियान्वयन की निगरानी के लिए पुरी के जिलाधिकारी एक मजिस्ट्रेट की तैनाती करेंगे।
पाधी ने कहा, “जब रत्न भंडार के आंतरिक कक्ष की इन्वेंट्री की जाएगी, तब प्रतिदिन गिनती और वजन पूरा होने के बाद चाबियों को जिला कोषागार में जमा करना होगा।”
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इन्वेंट्री की तारीखें एसजेटीएमसी की बैठक में राज्य सरकार की मंजूरी के साथ तय की जाएंगी।
रत्न भंडार में रखी वस्तुओं की पिछली इन्वेंट्री वर्ष 1978 में की गई थी, जिसे पूरा होने में 72 दिन लगे थे।
