नई दिल्ली, 18 फरवरी (पीटीआई) दिल्ली की एक अदालत ने जनकपुरी में खोदे गए गड्ढे में गिरकर 25 वर्षीय बाइकर की मौत के मामले में दो ठेकेदारों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि आरोपियों से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है और अपराध की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरलीन कौर ठेकेदार हिमांशु गुप्ता और कविश गुप्ता की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थीं, जिनके खिलाफ दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है।
अदालत ने कहा कि इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि आरोपी ठेकेदार गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं या दस्तावेजी साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकते हैं।
रोहिणी स्थित एक निजी बैंक में कार्यरत 25 वर्षीय कमल ध्यानी की 5-6 फरवरी की दरमियानी रात उस समय मौत हो गई थी, जब उनकी मोटरसाइकिल दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) द्वारा खोदे गए गड्ढे में गिर गई थी।
हिमांशु गुप्ता को राहत देने से इनकार करते हुए अदालत ने कहा, “आवेदक से जांच एजेंसी को हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता है। इस स्तर पर इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि आवेदक (ठेकेदार) मामले से जुड़े महत्वपूर्ण गवाहों या अन्य व्यक्तियों को प्रभावित करने या दस्तावेजी अथवा अन्य साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने का प्रयास कर सकता है।” अदालत ने कहा कि एफआईआर “बीस वर्ष की आयु के एक युवक की दुर्भाग्यपूर्ण मौत” का परिणाम है और अभियोजन का आरोप है कि यह पर्याप्त सुरक्षा उपाय न अपनाने के कारण हुआ।
अदालत ने कहा, “जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और जांच एजेंसी मामले से संबंधित सामग्री एकत्र करने की प्रक्रिया में है। बताया गया है कि आवेदक जांच के दौरान असहयोगी और टालमटोल करने वाला रहा है।”
अदालत ने कहा कि अपराध की गंभीरता और उसके सामाजिक प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
“अपराध की गंभीरता को देखते हुए वर्तमान आवेदन स्वीकार करने का कोई आधार नहीं बनता। आवेदक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की जाती है,” अदालत ने कहा।
सुनवाई के दौरान हिमांशु गुप्ता के वकील ने दलील दी कि डीजेबी ने काम को 9 अक्टूबर 2025 को ही मंजूरी दी थी, जबकि उस समय तक कॉर्पोरेट दिवाला कार्यवाही शुरू होने के बाद गुप्ता को कंपनी के निदेशक पद से निलंबित किया जा चुका था।
अतिरिक्त लोक अभियोजक मनीष सिधावत ने शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील आस्था चतुर्वेदी और पूजा शर्मा के साथ याचिका का विरोध किया।
उन्होंने कहा कि जांच के दौरान क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण से पता चला कि खुदाई स्थल पर चेतावनी बोर्ड या बैरिकेडिंग जैसे कोई एहतियाती उपाय नहीं किए गए थे।
अदालत ने उप-ठेकेदार राजेश कुमार प्रजापति की नियमित जमानत याचिका भी खारिज कर दी, जिसे इससे पहले मजिस्ट्रेट अदालत ने भी इसी मामले में राहत देने से इनकार कर दिया था।
अदालत को बताया गया कि गुप्ता 12, 14 और 17 फरवरी को जांच में शामिल हुए, लेकिन कथित रूप से टालमटोल जवाब दिए और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए।
अभियोजन ने आगे आरोप लगाया कि घटना के बाद भी वह सह-आरोपी प्रजापति के लगातार संपर्क में थे और यह अभी तय किया जाना बाकी है कि डीजेबी समझौते के तहत संबंधित अधिकारियों से आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।
11 फरवरी को अदालत ने दोनों आरोपी ठेकेदारों को बुधवार तक अंतरिम संरक्षण देते हुए निर्देश दिया था कि अगली सुनवाई तक उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
अब तक इस मामले में दो गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं, जबकि डीजेबी के तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है।
दिल्ली पुलिस ने प्रजापति और एक मजदूर योगेश को गिरफ्तार किया है, जो न्यायिक हिरासत में हैं।
प्रजापति पर आरोप है कि उन्होंने बाइकर के गड्ढे में गिरने की जानकारी छिपाई, जिससे पुलिस और आपातकालीन प्रतिक्रिया में देरी हुई। वहीं 23 वर्षीय मजदूर पर घटना की सूचना अधिकारियों को न देने और पूछताछ करने पर पीड़ित के परिवार को गुमराह करने का आरोप है। पीटीआई एसकेएम आरएचएल
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