जबलपुर कलेक्टर ने निजी फार्म पर घोड़ों की देखभाल जांचने के लिए समिति गठित की

जबलपुर, 19 जून (पीटीआई) — जिले में एक निजी फार्म पर हाल के दिनों में तीन घोड़ों की मौत के बाद स्थानीय प्रशासन ने गुरुवार को एक समिति का गठन किया है, जो यह जांचेगी कि घोड़ों की उचित देखभाल की जा रही है या नहीं।

मई में रायपुरा गांव के फार्म पर आठ घोड़ों की मौत हुई थी, जिसे गर्म मौसम से जोड़ा गया था।

जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना ने पत्रकारों को बताया, “जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि घोड़ों की सही देखभाल हो रही है या नहीं।”

मई 5 को जिला प्रशासन ने फार्म पर तीन पशु चिकित्सकों की टीम भेजी थी। ये घोड़े हैदराबाद से सचिन तिवारी द्वारा लाए गए थे।

इस बीच, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय शुक्रवार को पशु कल्याण कार्यकर्ता सिमरन इस्सर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें तिवारी के खिलाफ निर्देश मांगे गए हैं। तिवारी ने हैदराबाद से लगभग 49 घोड़ों को हिथानेट इंडिया के तहत जबलपुर लाया था।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि घोड़ों को बिना उचित दस्तावेज़ जैसे स्वामित्व, टीकाकरण, चिकित्सा इतिहास और अनुमति के रखा गया है।

तिवारी को याचिका में प्रतिवादी बनाया गया है, जिसमें आरोप है कि उन्होंने घोड़ों को हैदराबाद से जबलपुर अवैध रूप से स्थानांतरित किया।

मध्य प्रदेश सरकार ने घोड़ों की मौतों की जांच शुरू कर दी है, जिसमें आरोप है कि 57 घोड़ों को बिना आवश्यक दस्तावेज़ के हैदराबाद से जबलपुर लाया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ घोड़े गंभीर रूप से बीमार थे।

स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि सचिन तिवारी ने घोड़ों की बिगड़ती स्थिति की सूचना सबसे पहले दी थी, जबकि पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने पहले से ही इस मामले को उठाया था।

घोड़ों की देखभाल और परिवहन में अनियमितताओं की जांच के लिए पशु चिकित्सा विभाग को निर्देशित किया गया है।

यह निर्यात सौदा और जांच मध्य प्रदेश के मारहौरा फैक्ट्री के वैश्विक स्तर पर लोकोमोटिव निर्यात केंद्र बनने के साथ जुड़ा हुआ है, जिससे स्थानीय रोजगार और तकनीकी क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। PTI COR LAL KRK

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