जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने झीड़ी मेला का उद्घाटन किया, बाबा जित्तो की निस्वार्थ सेवा के मार्ग पर चलने की अपील

Jammu: Jammu and Kashmir Lieutenant Governor Manoj Sinha looks at persimmon fruits during the inauguration event of the 10-day annual 'Jhiri Mela' on the outskirts of Jammu, Tuesday, Nov. 4, 2025. (PTI Photo)(PTI11_04_2025_000096B) *** Local Caption ***

जम्मू, 4 नवंबर (PTI) जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को जम्मू के बाहरी क्षेत्र में शुरू हुए 10 दिवसीय वार्षिक झीड़ी मेला का उद्घाटन किया और लोगों से बाबा जित्तो के समानता, त्याग और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।

हर साल जम्मू क्षेत्र, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा से 10 से 12 लाख श्रद्धालु इस मेले में पहुँचते हैं, जहाँ किसान-संत बाबा जित्तो को श्रद्धांजलि दी जाती है। लगभग 500 वर्ष पहले उन्होंने एक जमींदार के शोषण का विरोध करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी।

सिन्हा ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर कहा,

“जम्मू के मार्ह सब-डिवीजन में वार्षिक झीड़ी मेला का उद्घाटन किया। बाबा जित्तो और बुआ कौरी को नमन किया। श्रद्धालुओं के लिए कम्युनिटी हॉल और चार मॉड्युलर बस स्टॉप समर्पित किए और CSR के तहत मार्ह में पहले इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखी।”

उन्होंने कहा कि बाबा जित्तो की शिक्षाएँ एक न्यायपूर्ण और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण के लिए प्रेरणा देती हैं।

“हम सब मिलकर एक मजबूत, सुरक्षित, समृद्ध और आत्मनिर्भर जम्मू-कश्मीर का निर्माण कर सकते हैं,” उपराज्यपाल ने कहा।

मेले के आयोजन की ज़िम्मेदारी पर्यटन निदेशालय और जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से संभाली है। 4 से 13 नवंबर तक चलने वाले इस आयोजन में कृषि व बागवानी विभाग तथा जम्मू नगर निगम द्वारा सफाई, स्वास्थ्य सुविधाएँ, पार्किंग और निर्बाध बिजली-पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

अधिकारियों ने बताया कि कृषि विभाग की भागीदारी किसानों को आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने में भी मदद करेगी, जो किसानों के अधिकारों की रक्षा करने वाले बाबा जित्तो की विरासत से जुड़ी है।

मेले के दौरान पुलिस व अर्धसैनिक बलों की तैनाती के साथ सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

किंवदंती के अनुसार, अन्यायपूर्ण मांगों का विरोध करते हुए बाबा जित्तो ने अपने प्राण त्याग दिए थे। उनकी बेटी बुआ कौरी ने भी शोक में उनके चिता में कूदकर अपने प्राण न्योछावर कर दिए। श्रद्धालु बाबा-दा-तलाब नामक पवित्र तालाब में स्नान भी करते हैं, जिसे उपचारात्मक माना जाता है। यह तालाब बाबा जी के मंदिर से लगभग चार किलोमीटर दूर स्थित है। (PTI)

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