
जम्मू, 4 जनवरी (पीटीआई): यहां प्रशासन ने कूरियर कंपनियों और पार्सल सेवाओं को बिना वैध परमिट के मादक पदार्थों, मनोदैहिक पदार्थों और अन्य प्रतिबंधित सामान के परिवहन से रोक दिया है। साथ ही, सभी कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
ये निर्देश शनिवार को जम्मू के जिला मजिस्ट्रेट राकेश मिन्हास द्वारा जारी किए गए।
आदेश में कहा गया है, “भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत प्रदत्त शक्तियों तथा एनडीपीएस अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत, जिला मजिस्ट्रेट जम्मू ने आदेश दिया है कि जिले में कार्यरत कोई भी कूरियर कंपनी, पार्सल सेवा या लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर तब तक किसी भी मादक पदार्थ, मनोदैहिक पदार्थ या अन्य प्रतिबंधित वस्तु को स्वीकार, बुक या परिवहन नहीं करेगा, जब तक उसके पास एनडीपीएस नियमों के तहत वैध परिवहन परमिट और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत निर्धारित नियमों के अनुसार अनुमति न हो।”
आदेश में कहा गया है कि सभी कूरियर कंपनियां और पार्सल सेवाएं प्रेषक और प्राप्तकर्ता की पहचान और प्रमाण-पत्रों का सख्ती से सत्यापन करेंगी, जिसमें वैध सरकारी पहचान पत्र शामिल होगा। साथ ही, प्रत्येक खेप का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा, जिसमें भेजने और प्राप्त करने वाले का विवरण, पार्सल का विवरण, वजन, बुकिंग रसीद, बुकिंग की तारीख, भुगतान का माध्यम और जहां लागू हो, लेनदेन का विवरण शामिल होगा।
कूरियर और पार्सल सेवा संचालकों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे अपने सभी कर्मचारियों — जिनमें डिलीवरी स्टाफ, लोडर, बुकिंग क्लर्क और फ्रेंचाइज़ी कर्मी शामिल हैं — का स्थानीय पुलिस के माध्यम से सत्यापन कराएं और ऐसे सत्यापित कर्मचारियों का अद्यतन रजिस्टर बनाए रखें।
इसके अलावा, कर्मचारियों को संदिग्ध खेप की पहचान करने और तुरंत नजदीकी पुलिस थाने को सूचना देने के लिए प्रशिक्षण देने को भी कहा गया है।
आदेश में कहा गया है, “इस आदेश का उल्लंघन करने वाली किसी भी कूरियर कंपनी या एजेंसी को व्यक्तिगत और कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। मालिकों, प्रबंध निदेशकों, निदेशकों, एजेंटों और इसमें शामिल सभी कर्मचारियों के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम, बीएनएसएस और अन्य लागू कानूनों की संबंधित धाराओं के तहत अभियोजन चलाया जा सकता है। दंड में खेप की जब्ती, लाइसेंस रद्द करना, जुर्माना और आपराधिक कार्रवाई शामिल हो सकती है।”
जिला मजिस्ट्रेट ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को आदेश के सख्त प्रवर्तन, निरीक्षण करने और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
आदेश में कहा गया है कि चूंकि सभी संबंधित लोगों को व्यक्तिगत रूप से नोटिस देना संभव नहीं है, इसलिए यह आदेश एकतरफा (एक्स-पार्टी) रूप से पारित किया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा और आठ सप्ताह की अवधि तक प्रभावी रहेगा, जब तक कि इसे पहले वापस न ले लिया जाए, तथा आवश्यकता अनुसार इसमें विस्तार या संशोधन किया जा सकता है।
आदेश में यह भी कहा गया है कि आदेश का उल्लंघन भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 (लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी आदेश की अवहेलना) के तहत कानूनी परिणामों को आकर्षित करेगा।
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