
नई दिल्ली, 9 जनवरी (PTI) – जर्मनी के राजदूत फिलिप अकर्मन ने गुरुवार को रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से मुलाकात की और सैन्य हार्डवेयर और उपकरण के सह-निर्माण (co-production) की संभावनाओं पर चर्चा की।
यह बैठक जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मेरज के भारत दौरे से कुछ दिन पहले हुई। अटकलें हैं कि मेरज के दौरे के दौरान भारत और जर्मनी एक अंतर-सरकारी समझौते (inter-governmental agreement) को अंतिम रूप दे सकते हैं, जिसके तहत भारतीय नौसेना को छह स्टील्थ पनडुब्बियों की आपूर्ति की जाएगी।
मेरज 12 और 13 जनवरी को भारत आएंगे। वे सोमवार को अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
अकर्मन और रक्षा सचिव की बैठक के बाद रक्षा मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा मुद्दों के अलावा “रक्षा उपकरण के सह-विकास और सह-उत्पादन के प्राथमिक क्षेत्रों” पर चर्चा की।
जर्मन रक्षा कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) रक्षा मंत्रालय के साथ छह स्टील्थ पनडुब्बियों की आपूर्ति के लिए 5 अरब यूरो की कीमत पर बातचीत कर रही हैं। यह अनुबंध एक अंतर-सरकारी समझौते के ढांचे में लागू होगा।
यह सौदा हाल के वर्षों की सबसे बड़े ‘मेक इन इंडिया’ परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है।
जून 2021 में, रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए छह पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को खरीदने की इस मेगा परियोजना को मंजूरी दी थी। इन पनडुब्बियों में स्थानीय सामग्री की महत्वपूर्ण मात्रा होने की संभावना है।
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