जल जीवन मिशन के अगले चरण में टिकाऊपन पर जोर: जल शक्ति मंत्री

नई दिल्ली, 10 जुलाई (पीटीआई) — जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने गुरुवार को कहा कि अब जल जीवन मिशन का फोकस अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) उपलब्ध कराने से आगे बढ़कर टिकाऊपन (सस्टेनेबिलिटी) पर होना चाहिए। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में सतत जल आपूर्ति और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत प्रणालियाँ विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

मंत्री पाटिल ने दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा,

“इस यात्रा का अगला चरण टिकाऊपन है।”

मिशन की उपलब्धि और आगे की राह

2019 में शुरू हुए जल जीवन मिशन के तहत अब तक 15 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल से जल कनेक्शन मिल चुका है।

पाटिल ने कहा कि यह उपलब्धि सरकार की सभी के लिए बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने की मजबूत प्रतिबद्धता का परिणाम है।

लेकिन अब सुरक्षित पेयजल की सतत उपलब्धता के लिए प्रभावी नीतियों और स्थानीय भागीदारी के साथ मजबूत प्रणालियाँ बनाना जरूरी है।

समुदाय की भागीदारी और महिला सशक्तिकरण

मंत्री ने बताया कि हर गाँव में पाँच महिलाओं को जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रशिक्षित किया गया है।

“यह न केवल स्थानीय निगरानी को सुनिश्चित करता है, बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाता है और समुदायों में विश्वास भी पैदा करता है,” उन्होंने कहा।

दीर्घकालिक प्रभाव और नीति निर्माण

पाटिल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ योजनाओं को पूरा करना नहीं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि वे उच्च गुणवत्ता वाली, अच्छी तरह से रखरखाव वाली और टिकाऊ हों।

“यह कार्यशाला संचालन और रखरखाव (O&M) के लिए मजबूत नीति ढाँचा तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत को जल-सुरक्षित राष्ट्र बनाने में सहायक होगा,” उन्होंने कहा।

कार्यशाला के मुख्य बिंदु

इस दो दिवसीय कार्यशाला में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि, जिलाधिकारी, अभियंता और नीति निर्माता शामिल हैं।

यहाँ ग्रामीण जल अवसंरचना के रखरखाव में सर्वोत्तम प्रथाओं, चुनौतियों और नवाचारों पर चर्चा होगी, जिसमें संस्थागत तंत्र, क्षमता निर्माण और तकनीकी अपनाने पर विशेष ध्यान रहेगा ताकि दीर्घकालिक सेवा सुनिश्चित की जा सके।

(PTI UZM DIV DIV)

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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