जैसे-जैसे नेतन्याहू गाज़ा पर पूर्ण कब्जे की ओर बढ़ रहे हैं, इज़राइल अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता के संकट का सामना कर रहा है

पर्थ, 10 अगस्त (द कन्वर्सेशन)

अपने आप को लोकतंत्र बताने और अंतरराष्ट्रीय कानून व युद्ध के नियमों का पालन करने का दावा करने के बावजूद, इज़राइल की वैश्विक प्रतिष्ठा पूरी तरह गिर चुकी है।

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की गाज़ा पर पूर्ण सैन्य कब्ज़े की ताज़ा योजना, पट्टी में बढ़ते अकाल संकट और वेस्ट बैंक में इज़राइल के दमनकारी उपाय, देश की दयनीय स्थिति को उजागर करते हैं।

अमेरिकी समर्थन के बावजूद, यहूदी राज्य अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता के संकट का सामना कर रहा है, जिससे लंबे समय तक उबर पाना मुश्किल हो सकता है।

हाल ही के प्यू सर्वे के अनुसार, अब इज़राइल के प्रति अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण सकारात्मक से अधिक नकारात्मक है। 2025 की शुरुआत में नीदरलैंड (78%), जापान (79%), स्पेन (75%), ऑस्ट्रेलिया (74%), तुर्किये (93%) और स्वीडन (75%) जैसे देशों में अधिकांश लोगों ने कहा कि उनका इज़राइल के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण है।

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने नेतन्याहू और इज़राइल के पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप में गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। कई अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों, नरसंहार शोधकर्ताओं और मानवाधिकार संगठनों ने भी इज़राइल पर गाज़ा में नरसंहार का आरोप लगाया है।

इज़राइल के पारंपरिक समर्थकों ने भी, देश और विदेश दोनों में, नेतन्याहू सरकार की आलोचना की है। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री एहुद ओलमर्ट और एहुद बराक, इज़राइली साहित्यकार डेविड ग्रॉसमैन, मसोरती यहूदी धर्म के रब्बी जोनाथन विटनबर्ग और रब्बी डेलफिन हॉरविलर शामिल हैं।

इसके अलावा, सैकड़ों सेवानिवृत्त इज़राइली सुरक्षा अधिकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से नेतन्याहू पर युद्ध समाप्त करने के लिए दबाव डालने की अपील की है।

इज़राइल के वैश्विक साझेदार दूरी बना रहे हैं

हाल के हफ्तों में गाज़ा में भूखे बच्चों की तस्वीरें समाचारों में छाने के बाद, पश्चिमी गठबंधन में इज़राइल के कई मित्र अब उसकी नीतियों को सहन नहीं कर पा रहे हैं।

वैश्विक राय में बड़े बदलाव के तहत, फ्रांस ने सितंबर में फिलिस्तीन को मान्यता देने की घोषणा की। ब्रिटेन और कनाडा ने भी ऐसा करने की कसम खाई। यहां तक कि जर्मनी ने भी मान्यता प्रक्रिया शुरू कर दी है। और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने संकेत दिया है कि उनके देश द्वारा फिलिस्तीन की मान्यता अब केवल समय की बात है।

स्पेन और स्वीडन ने यूरोपीय संघ के इज़राइल के साथ व्यापार समझौते को निलंबित करने की मांग की है, जबकि नीदरलैंड ने इज़राइल को आधिकारिक तौर पर “सुरक्षा खतरा” करार दिया है, यह कहते हुए कि उसने डच जनमत को प्रभावित करने की कोशिश की।

इज़राइल और अमेरिका ने इन सभी आरोपों और कदमों को खारिज कर दिया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इज़राइल के खिलाफ बढ़ता रुख उसे अमेरिका के अलावा किसी बड़े वैश्विक समर्थक से वंचित कर रहा है।

अब इज़राइल की संप्रभुता, सुरक्षा और समृद्धि पूरी तरह अमेरिका के निरंतर समर्थन पर टिकी है। अमेरिकी सहायता, खासकर अरबों डॉलर के हथियार निर्यात के बिना, इज़राइल 1967 के अरब-इज़राइली युद्ध से अब तक गाज़ा अभियान और वेस्ट बैंक व पूर्वी येरुशलम के दमनकारी कब्जे को बनाए रखना मुश्किल पाता।

फिर भी, ट्रंप के गहरे समर्थन के बावजूद, अमेरिका के मतदाताओं में नेतन्याहू के वॉशिंगटन में प्रभाव और इज़राइल को दी जाने वाली अमेरिकी सहायता के मूल्य पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

मार्च के गैलप सर्वेक्षण के अनुसार, आधे से कम अमेरिकी इज़राइल के प्रति सहानुभूति रखते हैं।

यह असंतोष ट्रंप के कुछ मैगा विचारधारकों और समर्थकों, जैसे राजनीतिक रणनीतिकार स्टीव बैनन और संसदीय कट्टरपंथी मार्जोरी टेलर ग्रीन, द्वारा भी व्यक्त किया गया है। यहां तक कि ट्रंप ने भी गाज़ा में अकाल न होने के नेतन्याहू के दावे पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाया।

दो-राष्ट्र समाधान पर इज़राइलियों का उदासीन नजरिया

कई इज़राइली नेतन्याहू और उनके अतिवादी दक्षिणपंथी सत्तारूढ़ दल से छुटकारा पाना चाहते हैं, खासकर इस तथ्य को देखते हुए कि वे हमास से सभी बंधकों को छुड़ाने में असफल रहे।

कई लोग युद्ध समाप्त करना भी चाहते हैं। इज़राइल के चैनल 12 के हालिया सर्वेक्षण में पाया गया कि 74% इज़राइली युद्ध समाप्त करने और हमास के पास बचे बंधकों को छोड़ने के समझौते का समर्थन करते हैं।

हालांकि, अधिकांश इज़राइली भविष्य के फिलिस्तीनी राज्य को लेकर नकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं।

एक अमेरिकी अकादमिक द्वारा करवाए गए सर्वेक्षण में 82% यहूदी इज़राइली उत्तरदाताओं ने गाज़ा से फिलिस्तीनियों को निष्कासित करने का समर्थन किया। और 2025 की शुरुआत में प्यू सर्वेक्षण ने दिखाया कि केवल 16% यहूदी इज़राइली मानते हैं कि फिलिस्तीनी राज्य के साथ शांतिपूर्ण सहअस्तित्व संभव है — 2013 में यह सवाल पूछे जाने के बाद से सबसे कम प्रतिशत।

यह दर्शाता है कि न केवल इज़राइली राज्य, बल्कि उसका मतदाता वर्ग भी, फिलिस्तीनियों के स्वतंत्र राज्य के अधिकार को स्वीकार करने के मामले में राजनीतिक रूप से अतिवाद की ओर बढ़ गया है।

अंतरराष्ट्रीय दबाव में, नेतन्याहू ने गाज़ा में थोड़ी अधिक मानवीय सहायता की अनुमति दी है। हालांकि, गाज़ा पर पूर्ण सैन्य कब्जे की उनकी नई योजना दर्शाती है कि जब तक अमेरिकी समर्थन स्थिर है, वे युद्ध की दिशा बदलने के लिए तैयार नहीं हैं।

उनकी सरकार हमास को खत्म करने और संभवतः गाज़ा को खाली कराने और उसे मिलाने पर तुली है, इसके बाद वेस्ट बैंक भी। ऐसा कदम दो-राष्ट्र समाधान के विचार को पूरी तरह समाप्त कर देगा।

इसे रोकने के लिए, वॉशिंगटन को बाकी वैश्विक समुदाय के साथ तालमेल बिठाना होगा। अन्यथा, एक बेकाबू और अलग-थलग इज़राइल केवल अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगियों के बीच दरार को और गहरा करेगा, खासकर इस अत्यधिक ध्रुवीकृत दुनिया में।

(द कन्वर्सेशन) GRS GRS

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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