जो आज विशेषाधिकारों से चिपके रहने की कोशिश करेंगे, उन्हें कल इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार पर यूएन प्रमुख

U.N. Secretary-General Antonio Guterres speaks during a news conference at the COP30 U.N. Climate Summit, Thursday, Nov. 20, 2025, in Belem, Brazil. AP/PTI(AP11_20_2025_000627B)

संयुक्त राष्ट्र, 16 जनवरी (पीटीआई) — संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने कहा कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों को सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार की अगुवाई करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जो देश आज अपने विशेषाधिकारों से चिपके रहने की कोशिश करेंगे, उन्हें कल इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

193 सदस्यीय महासभा को 2026 के लिए अपनी प्राथमिकताओं पर संबोधित करते हुए गुटेरेस ने गुरुवार को कहा, “सुधार ऐसे संस्थानों के बारे में होना चाहिए जो आज की दुनिया को प्रतिबिंबित करें। 1945 के समाधान 2026 की समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते। यदि संस्थाएं हमारे समय, हमारी दुनिया और हमारी वास्तविकताओं को नहीं दर्शातीं, तो वे अपनी वैधता खो देंगी।”

वैश्विक संस्थानों में समकालीन वास्तविकताओं के अनुरूप सुधार की जोरदार अपील करते हुए गुटेरेस ने कहा कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं के पास मौजूद वैश्विक जीडीपी का हिस्सा हर दिन धीरे-धीरे घट रहा है, जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाएं आकार, शक्ति और प्रभाव में बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा, “हर दिन दक्षिण-दक्षिण व्यापार, उत्तर-उत्तर व्यापार से आगे निकल रहा है। हमारी संस्थागत संरचनाओं को इस बदलती दुनिया को प्रतिबिंबित करना चाहिए। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और व्यापार संस्थानों में सुधार केवल महत्वपूर्ण ही नहीं, बल्कि अनिवार्य है।” उन्होंने जोड़ा कि “यही बात सुरक्षा परिषद पर भी लागू होती है।”

गुटेरेस ने इस बात पर जोर दिया कि जिनके पास सबसे अधिक शक्ति है, उनके हित में ही यह है कि वे सुधार की अग्रिम पंक्ति में रहें।

उन्होंने कहा, “जो आज अपने विशेषाधिकारों से चिपके रहने की कोशिश करते हैं, उन्हें कल इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसलिए हम सभी को बदलाव के लिए पर्याप्त साहसी होना होगा। दुनिया इंतजार नहीं कर रही है और न ही हमें करना चाहिए।”

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख का दूसरा पांच वर्षीय कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को समाप्त होगा। यह टिप्पणियां उन्होंने महासभा में वर्ष के लिए अपनी प्राथमिकताओं पर पारंपरिक संबोधन के दौरान कीं।

अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष में प्रवेश करते हुए गुटेरेस ने कहा कि वह 2026 के हर दिन को सार्थक बनाएंगे और एक बेहतर दुनिया के लिए काम करने, संघर्ष करने और प्रयास जारी रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध और दृढ़ संकल्पित हैं।

भारत दशकों से सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग का नेतृत्व करता रहा है, जिसमें स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार शामिल है। भारत का कहना है कि 1945 में गठित 15 सदस्यीय परिषद 21वीं सदी के लिए उपयुक्त नहीं है और यह समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती। नई दिल्ली ने यह भी रेखांकित किया है कि वह सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का उचित हकदार है।

भारत आखिरी बार 2021-22 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य के रूप में शामिल हुआ था। अत्यधिक ध्रुवीकृत सुरक्षा परिषद यूक्रेन युद्ध और इजरायल-हमास संघर्ष जैसे मुद्दों पर गहरे मतभेदों के कारण वर्तमान शांति और सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में विफल रही है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर एल्डोस मैथ्यू पुन्नूस ने ‘संगठन के कार्यों पर महासचिव की रिपोर्ट’ विषय पर महासभा की पूर्ण बैठक में राष्ट्रीय वक्तव्य देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र की अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर प्रभावी हस्तक्षेप करने में असमर्थता उसकी प्रभावशीलता, वैधता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है।

उन्होंने कहा, “यह अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के मामले में विशेष रूप से स्पष्ट है। जब दुनिया के विभिन्न हिस्सों में संघर्ष जारी हैं, तब विश्व संयुक्त राष्ट्र से उम्मीद करता है कि वह मानवीय पीड़ा और दुख को समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए।”

भारत ने जोर देकर कहा कि मानवता के लिए निर्धारित महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करने में मौजूद खामियां संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा संरचना की गहन समीक्षा की मांग करती हैं।

पुन्नूस ने कहा, “यह समीक्षा सुधार की अत्यंत आवश्यकता को रेखांकित करती है। यह अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्यता है।”

संयुक्त राष्ट्र के 80 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पुन्नूस ने कहा कि सदस्य देशों को सुधारित बहुपक्षवाद के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए साझा उद्देश्य की भावना के साथ मिलकर काम करना होगा।

उन्होंने कहा, “सुरक्षा परिषद में सुधार इस प्रक्रिया का केंद्रीय तत्व है। यूएनएससी को समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करना चाहिए। स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों का विस्तार किया जाना चाहिए। ये समयोचित बदलाव संयुक्त राष्ट्र को उद्देश्य के अनुरूप बनाने और वर्तमान तथा भविष्य की चुनौतियों का सार्थक रूप से सामना करने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक हैं।” (पीटीआई)