झारखंड हाईकोर्ट ने बच्चों को ‘दूषित रक्त’ चढ़ाए जाने के मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए

Jharkhand High Court

रांची, 5 फरवरी (पीटीआई)

झारखंड हाईकोर्ट ने पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा में बच्चों को कथित रूप से दूषित रक्त चढ़ाए जाने के मामले में राज्य पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति गौतम कुमार चौधरी की अदालत दीपक हेम्ब्रम द्वारा दायर एक आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में हेम्ब्रम ने दावा किया कि तमाम प्रयासों के बावजूद चाईबासा के सदर थाना में इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

हाईकोर्ट ने चाईबासा सदर थाना प्रभारी को एफआईआर दर्ज करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

इससे पहले, हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने रक्त आधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) के लिए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन नहीं किए जाने पर राज्य सरकार को फटकार लगाई थी। आरोप है कि इसी लापरवाही के कारण झारखंड में पांच बच्चों को एचआईवी संक्रमण हो गया।

मुख्य न्यायाधीश तारलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान लेकर दायर जनहित याचिका (सुओ मोटो पीआईएल) की सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह को कड़ी फटकार लगाई थी। यह कार्रवाई उन रिपोर्टों के बाद की गई, जिनमें कहा गया था कि चाईबासा जिले के पांच बच्चे, जिन्हें रक्त चढ़ाया गया था, एचआईवी पॉजिटिव पाए गए।

ये बच्चे थैलेसीमिया के मरीज थे और इलाज के लिए चाईबासा के सदर अस्पताल आए थे, जहां उन्हें रक्त आधान दिया गया था।

हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव को शपथपत्र दाखिल कर राज्य में सरकारी और निजी अस्पतालों में आयोजित रक्तदान शिविरों का विवरण अदालत को देने का निर्देश दिया था।

अदालत ने विभाग को राष्ट्रीय रक्त नीति (नेशनल ब्लड पॉलिसी) के अनुरूप तैयार की जाने वाली मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी पीठ के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

इस मामले में झारखंड सरकार ने 26 अक्टूबर को पश्चिमी सिंहभूम के सिविल सर्जन और कुछ अन्य अधिकारियों को निलंबित कर दिया था।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर इस घटना की उच्चस्तरीय जांच भी जारी है।

(पीटीआई)

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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