प्रयागराज, 16 जनवरी (पीटीआई) — कुछ लोगों द्वारा झूठी एफआईआर दर्ज कराए जाने पर कड़ा संज्ञान लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को निर्देश दिया है कि ऐसे झूठे या दुर्भावनापूर्ण मुकदमे दर्ज कराने वालों के खिलाफ अनिवार्य रूप से अभियोजन की कार्रवाई शुरू की जाए।
अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर संबंधित पुलिस अधिकारी अभियोजन और विभागीय कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होंगे।
न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरी ने बुधवार को पारित आदेश में कहा,
“यदि इस न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणियों का अक्षरशः और भावना के अनुरूप पालन नहीं किया गया, तो यह न्यायालय की अवमानना मानी जाएगी और पीड़ित व्यक्ति पुलिस अधिकारियों तथा न्यायिक अधिकारियों के इस अवमाननापूर्ण आचरण के विरुद्ध उचित कार्रवाई के लिए इस न्यायालय का रुख कर सकता है।”
यह आदेश अलीगढ़ की उम्मे फरवा द्वारा दायर याचिका का निस्तारण करते हुए पारित किया गया।
अदालत ने कहा,
“पुलिस महानिदेशक सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश जारी करें कि यदि किसी मामले में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर अभियुक्त को दोषमुक्त किया जाता है, तो ऐसे प्रत्येक मामले में, जहां पुलिस तंत्र का दुरुपयोग झूठी, तुच्छ या भ्रामक जानकारी देकर किया गया हो, वहां बीएनएसएस की धारा 212 और 217 के तहत संबंधित अपराध के लिए सूचना देने वाले और मामले के गवाहों के खिलाफ सक्षम मजिस्ट्रेट/अदालत के समक्ष लिखित शिकायत अनिवार्य रूप से दर्ज कराई जाए।”
इस संबंध में पुलिस महानिदेशक, पुलिस आयुक्त, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक, सभी विवेचना अधिकारियों, थाना प्रभारियों और अग्रेषण अधिकारियों को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। (पीटीआई)

