टेक्नीशियन की मौत मामला: एनजीटी ने खाई में जलभराव पर जताई चिंता, नोएडा प्राधिकरण से मांगा जवाब

The National Green Tribunal

नई दिल्ली, 22 जनवरी (PTI): राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गुरुवार को नोएडा प्राधिकरण और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अधिकरण ने नोएडा में एक खाई में जलभराव के कारण एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की डूबकर मौत के मामले में स्टॉर्मवॉटर प्रबंधन में कथित चूकों और लंबे समय से जलजमाव पर चिंता जताई है।

एनजीटी इस मामले की सुनवाई कर रहा था, जिसमें उसने सेक्टर-150 स्थित एक वाणिज्यिक स्थल पर जलभराव वाली खाई में वाहन गिरने से युवराज मेहता की मौत संबंधी एक अखबार की रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया था।

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि “घने कोहरे के कारण मेहता ने तीखा दायां मोड़ लिया और खाई में गिर गए। जिस जमीन पर यह हादसा हुआ, वह पहले एक निजी मॉल परियोजना के लिए आवंटित थी, लेकिन आसपास की हाउसिंग सोसायटियों से वर्षाजल और अपशिष्ट जल जमा होने के कारण एक दशक से तालाब में बदल गई थी।”

पीठ ने यह भी नोट किया कि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा 2015 में तैयार की गई स्टॉर्मवॉटर प्रबंधन योजना कई दौर के सर्वेक्षण और साइट निरीक्षण के बावजूद कागजों तक ही सीमित रही।

अधिकरण ने कहा, “खबर के अनुसार, मौजूदा नालों से बढ़ते जलप्रवाह को समुचित रूप से नियंत्रित नहीं किया गया। नियंत्रक (रेगुलेटर) के अभाव में बारिश का पानी हिंडन नदी में नहीं छोड़ा जा सका, जिससे आसपास की कई हाउसिंग सोसायटियों के बेसमेंट में पानी भर गया। नियंत्रित निकासी न होने से पानी जमा होता रहा और नदी में बैकफ्लो का खतरा बढ़ा।”

एनजीटी ने जलभराव को लेकर नोएडा प्राधिकरण की कथित निष्क्रियता पर स्थानीय निवासियों के आरोपों का भी संज्ञान लिया।

अधिकरण ने कहा, “खबर से स्पष्ट होता है कि नोएडा प्राधिकरण द्वारा सुधारात्मक कदम न उठाने के कारण यह हादसा हुआ, जिसमें व्यक्ति की जान चली गई। यह मामला पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के उल्लंघन की ओर इशारा करता है और पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन से जुड़े गंभीर मुद्दे उठाता है।”

एनजीटी ने नोएडा प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य के पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव और गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी को इस मामले में पक्षकार बनाया है।

अधिकरण ने सभी प्रतिवादियों को निर्देश दिया है कि वे अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले, यानी 10 अप्रैल तक, शपथपत्र के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करें।

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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