
वॉशिंगटन, 9 मार्च (एपी) – राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वादा किया था कि 2026 आर्थिक वृद्धि के लिए शानदार साल होगा, लेकिन इसकी शुरुआत नौकरी में कमी, पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और अमेरिका के भविष्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितताओं के साथ हुई है।
करीब दो सप्ताह पहले दिए गए अपने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में रिपब्लिकन राष्ट्रपति ने आत्मविश्वास से कहा था, “गरजती हुई अर्थव्यवस्था पहले से कहीं अधिक गरज रही है।” लेकिन नौकरियों, ईंधन की कीमतों और शेयर बाजार से जुड़े ताज़ा आंकड़े संकेत देते हैं कि ट्रंप की यह “गरज” अब काफी हद तक धीमी पड़ती दिख रही है।
ट्रंप द्वारा अनुमानित आर्थिक उछाल और वास्तविक परिणामों के बीच अंतर दिखाई दे रहा है। यह अंतर इस साल होने वाले मिड-टर्म चुनावों की दिशा तय कर सकता है, क्योंकि ट्रंप प्रतिनिधि सभा और सीनेट में अपनी पार्टी के बहुमत को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप के टैरिफ विवाद के बीच ईरान युद्ध ने तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों को लेकर महंगाई की नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। हालांकि व्हाइट हाउस का कहना है कि साल की शुरुआत है और आगे मजबूत आर्थिक वृद्धि देखने को मिलेगी।
नौकरियों में उछाल के संकेत नहीं
11 फरवरी को मासिक रोजगार रिपोर्ट में जनवरी में 1.30 लाख नई नौकरियां बनने के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा था, “वाह! अमेरिका का स्वर्ण युग आ गया है!!!”
लेकिन उसके बाद नौकरी बाजार चिंताजनक रूप से कमजोर दिखने लगा है।
शुक्रवार को जारी रोजगार रिपोर्ट के अनुसार फरवरी में 92,000 नौकरियां कम हुईं। जनवरी और दिसंबर के आंकड़ों में भी संशोधन किया गया, जिसमें दिसंबर में 17,000 नौकरियों की कमी दर्ज की गई। मासिक आंकड़े उतार-चढ़ाव वाले हो सकते हैं, लेकिन अब एक रुझान सामने आने लगा है जो लगातार कमजोरी दिखाता है।
स्वास्थ्य क्षेत्र को छोड़ दें तो जनवरी 2025 में ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से अर्थव्यवस्था में लगभग 2,02,000 नौकरियां कम हो चुकी होतीं। हालांकि प्रशासन का कहना है कि आवास क्षेत्र के बाहर निर्माण क्षेत्र में बढ़ी नौकरियां भविष्य में भर्ती बढ़ने का संकेत देती हैं।
ट्रंप अक्सर दावा करते हैं कि नौकरियां अब अमेरिका में जन्मे लोगों को मिल रही हैं, न कि प्रवासियों को। लेकिन हालिया रिपोर्ट इस दावे को भी चुनौती देती है।
अमेरिका में जन्मे लोगों की बेरोजगारी दर पिछले 12 महीनों में 4.4 प्रतिशत से बढ़कर 4.7 प्रतिशत हो गई है। इसका मतलब है कि जिन लोगों को ट्रंप की आव्रजन सख्ती के कारण नौकरियां मिलने की बात कही गई थी, उनमें से अधिक लोग अब काम की तलाश कर रहे हैं।
पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी
टेक्सास में फरवरी में दिए गए भाषण में ट्रंप ने कहा था, “ऊर्जा लागत को कम करना अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए कीमतें घटाने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है। जब आप ऊर्जा की कीमत कम करते हैं, तो आप लगभग हर चीज़ की कीमत कम कर देते हैं।”
राष्ट्रपति बार-बार कहते रहे हैं कि पेट्रोल सस्ता रखना महंगाई को नियंत्रित करने की कुंजी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ड्राइविंग सस्ती हो रही है।
लेकिन 28 फरवरी से शुरू हुए ईरान पर हमलों के बाद यह कहानी बदलती दिख रही है। एएए के अनुसार पिछले एक महीने में पेट्रोल की औसत राष्ट्रीय कीमत 19 प्रतिशत बढ़कर 3.45 डॉलर प्रति गैलन हो गई है।
निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि यदि तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो महंगाई जनवरी के 2.4 प्रतिशत से बढ़कर साल के अंत तक 3 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
प्रशासन का मानना है कि ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित किया जा सकेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि या तो संघर्ष जल्द समाप्त होगा या फिर होर्मुज जलडमरूमध्य से अधिक तेल टैंकरों की आवाजाही सुनिश्चित की जा सकेगी।
अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने सीएनएन के कार्यक्रम “स्टेट ऑफ द यूनियन” में कहा, “समयसीमा का सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता, लेकिन सबसे खराब स्थिति में भी यह कुछ हफ्तों की बात है, महीनों की नहीं।”
शेयर बाजार ऊंचाई से नीचे
व्हाइट हाउस में गुरुवार को ट्रंप ने कहा, “हमने इतिहास में रिकॉर्ड बनाया है, जब डाउ 50,000 तक पहुंच गया।”
लेकिन अब यह दावा कमजोर पड़ता दिख रहा है। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज पिछले एक महीने में लगभग 5 प्रतिशत गिर गया है।
ट्रंप के कार्यकाल में शेयर बाजार बढ़ा जरूर है, लेकिन ऐसा पहले भी हुआ था जब डेमोक्रेट नेता जो बाइडेन राष्ट्रपति थे। यदि ईरान के साथ युद्ध समाप्त हो जाता है और कंपनियों का मुनाफा मजबूत रहता है, तो हालिया गिरावट पलट भी सकती है।
फिर भी यह गिरावट चेतावनी का संकेत मानी जा रही है, खासकर तब जब प्रशासन लोगों को “ट्रंप अकाउंट्स” जैसे निवेश माध्यमों के जरिए शेयर बाजार में निवेश के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
अर्थव्यवस्था पर लोगों की धारणा
शेयर बाजार अब लोगों की आर्थिक धारणा का भी पैमाना बन गया है। जिन लोगों ने बाजार में निवेश किया है, उनमें आमतौर पर अधिक विश्वास दिखाई देता है, जबकि जिनके पास निवेश नहीं है वे अधिक निराशावादी रहते हैं।
मिशिगन विश्वविद्यालय की उपभोक्ता सर्वेक्षण निदेशक जोआन हसू ने कहा कि फरवरी में शेयर रखने वाले लोगों के विश्वास में “काफी” बढ़ोतरी हुई, लेकिन जिन उपभोक्ताओं के पास शेयर नहीं हैं उनके विश्वास में आई गिरावट ने इसे संतुलित कर दिया।
बाइडेन के दौर में तेज़ थी आर्थिक वृद्धि
जनवरी में स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच में ट्रंप ने कहा था, “बाइडेन प्रशासन के दौरान अमेरिका ठहराव और महंगाई के बुरे दौर से गुजरा।”
लेकिन आंकड़े अलग तस्वीर दिखाते हैं। 2024 में बाइडेन के अंतिम वर्ष में अमेरिकी अर्थव्यवस्था 2.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जबकि 2025 में ट्रंप के कार्यकाल में वृद्धि दर 2.2 प्रतिशत रही।
महंगाई के मामले में भी फेडरल रिजर्व द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाला प्रमुख सूचकांक — व्यक्तिगत उपभोग व्यय मूल्य सूचकांक — 2024 और 2025 दोनों में 2.6 प्रतिशत रहा।
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