लंदन, 25 नवंबर (AP):
BBC के चेयरमैन ने सोमवार को स्वीकार किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण के भ्रामक संपादन पर प्रतिक्रिया देने में प्रसारक की तरफ से “देरी” हुई, लेकिन इस आरोप को खारिज कर दिया कि BBC की निष्पक्षता उसके बोर्ड के भीतर से प्रभावित हो रही है।
BBC के वरिष्ठ अधिकारियों को संसद की कल्चर, मीडिया एंड स्पोर्ट कमेटी ने तलब किया, क्योंकि इस महीने की शुरुआत में इसके महानिदेशक और समाचार प्रमुख दोनों के इस्तीफे और ट्रंप द्वारा एक अरब डॉलर की मानहानि का मुकदमा दायर करने की धमकी के बाद संस्था बड़े संकट से गुजर रही है।
‘भ्रामक संपादन’ विवाद कैसे शुरू हुआ?
BBC पर ट्रंप की नाराज़गी तब भड़की जब उसके पूर्व बाहरी सलाहकार द्वारा तैयार एक आंतरिक मेमो मीडिया में लीक हो गया। इसमें BBC की ट्रंप पर बनी डॉक्यूमेंट्री, ट्रांसजेंडर मुद्दों, गाज़ा और नस्ल से जुड़े मामलों पर कवरेज को “पक्षपातपूर्ण” बताया गया था।
डॉक्यूमेंट्री “Trump: A Second Chance?” में 6 जनवरी 2021 के ट्रंप के भाषण के तीन अंशों को जोड़कर ऐसा दिखाया गया जैसे ट्रंप समर्थकों को “फाइट लाइक हेल” कहते हुए कैपिटल पर हमला करने के लिए सीधे उकसा रहे हों। चेयरमैन समीर शाह ने माना कि इससे हिंसा के सीधे आह्वान का गलत प्रभाव पैदा हुआ।
शाह ने कहा:
“हमें बहुत पहले प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी… हमें तुरंत जांच कर स्थिति साफ़ करनी चाहिए थी, न कि इसे सार्वजनिक विवाद बनने देना चाहिए था।”
BBC ने पिछले हफ्ते व्हाइट हाउस को पत्र लिखकर इस संपादन पर खेद जताया, लेकिन यह भी कहा कि उसने ट्रंप की मानहानि नहीं की और मुकदमे की धमकी का कोई आधार नहीं है।
राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप
BBC बोर्ड के सदस्य रॉबी गिब — जो पूर्व प्रधानमंत्री थेरेसा मे की सरकार में कम्युनिकेशंस डायरेक्टर रह चुके हैं — पर लग रहे कंज़र्वेटिव पार्टी पक्षपात के आरोप भी चर्चा में रहे।
गिब ने कहा:
“मुझे एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है… ये दावे कि मैंने किसी तरह आंतरिक तख्तापलट कराया, पूरी तरह बकवास हैं।”
इसी बीच एक और बोर्ड सदस्य, शुमीत बनर्जी ने “गवर्नेंस इश्यूज़” का हवाला देकर इस्तीफा दिया, जिससे संकट और गहरा गया।
शाह ने कहा कि उनकी प्राथमिकता अब “संस्था को स्थिर करना” और नया महानिदेशक चुनना है।
‘एडिटोरियल ब्लाइंड स्पॉट’ की ओर इशारा
पूर्व पत्रकार और BBC के बाहरी एडिटोरियल स्टैंडर्ड्स सलाहकार माइकल प्रेस्कॉट ने संपादकीय चूक के कई मामलों पर प्रश्न उठाए।
उनके मेमो में BBC पर ट्रांस मुद्दों पर “प्रो-ट्रांस एजेंडा” बढ़ावा देने और अरबी सेवा में “एंटी-इज़राइल पूर्वाग्रह” के आरोप भी लगाए गए थे।
प्रेस्कॉट ने कहा कि BBC में शिकायतों को गंभीरता से लेने की “प्रणालीगत कमजोरी” है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनके अनुसार BBC में “संस्थागत पक्षपात” नहीं है।
अन्य विवाद
अक्टूबर में ब्रिटेन की मीडिया नियामक संस्था ने गाज़ा के बच्चों पर बनी BBC की डॉक्यूमेंट्री को “भ्रामक” बताते हुए इसे दंडित किया था, क्योंकि इसमें यह नहीं बताया गया था कि किशोर कथावाचक का पिता हमास प्रशासन का हिस्सा था। इससे BBC की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए।
BBC पर मुकदमे की सफलता संदिग्ध
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के लिए यूके या अमेरिका में BBC पर मुकदमा जीतना मुश्किल होगा, क्योंकि BBC यह साबित कर सकती है कि इससे ट्रंप को कोई वास्तविक नुकसान नहीं हुआ — क्योंकि अंततः वे 2024 में राष्ट्रपति बन गए।
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