
संयुक्त राष्ट्र/वॉशिंगटन, 8 जनवरी (पीटीआई) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र के निकायों और भारत-फ्रांस के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (इंटरनेशनल सोलर अलायंस) सहित 60 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका को बाहर निकाल लिया है। उन्होंने इन संस्थाओं को “अनावश्यक” और अमेरिका के हितों के “विपरीत” बताया।
ट्रंप ने बुधवार को ‘संयुक्त राज्य अमेरिका के हितों के विपरीत अंतरराष्ट्रीय संगठनों, सम्मेलनों और संधियों से अमेरिका की वापसी’ शीर्षक से एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
हस्ताक्षर के बाद ट्रंप ने कहा कि उन्होंने यह निर्धारित किया है कि 66 संयुक्त राष्ट्र और गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठनों का सदस्य बने रहना, उनमें भागीदारी करना या उन्हें किसी भी तरह का समर्थन देना अमेरिका के हितों के “विपरीत” है।
व्हाइट हाउस द्वारा बुधवार को जारी एक फैक्ट शीट के अनुसार, इस सूची में 31 संयुक्त राष्ट्र इकाइयां और 35 गैर-यूएन संगठन शामिल हैं, जो “अमेरिका के राष्ट्रीय हितों, सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि या संप्रभुता के विपरीत काम करते हैं।”
ट्रंप ने सभी कार्यकारी विभागों और एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे इन संगठनों से अमेरिका की वापसी को “यथाशीघ्र” लागू करने के लिए तत्काल कदम उठाएं।
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की इकाइयों के मामले में वापसी का अर्थ कानून द्वारा अनुमत सीमा तक उन संस्थाओं में भागीदारी या फंडिंग को समाप्त करना है।
इस सूची में जलवायु परिवर्तन पर भारत और फ्रांस की साझा पहल अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन भी शामिल है। वर्तमान में 100 से अधिक देश आईएसए के हस्ताक्षरकर्ता हैं और 90 से अधिक देशों ने पूर्ण सदस्य बनने के लिए इसका अनुमोदन किया है।
संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने उन संगठनों की पूरी सूची देख ली है, जिनसे ट्रंप प्रशासन अमेरिका को बाहर निकाल रहा है, और इस पर गुरुवार को टिप्पणी दी जाएगी। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने एक्स पर कहा कि अमेरिका अब उन अंतरराष्ट्रीय संगठनों को न तो फंड देगा और न ही उनमें भागीदारी करेगा, जो अमेरिकी हितों की सेवा नहीं करते या कई मामलों में उनके खिलाफ काम करते हैं।
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने 66 संस्थानों को “अपने कार्यक्षेत्र में दोहराव वाला, कुप्रबंधित, अनावश्यक, फिजूलखर्च, खराब तरीके से संचालित, ऐसे तत्वों के प्रभाव में जो अपने एजेंडे को आगे बढ़ाते हैं और हमारे हितों के विपरीत हैं, या हमारी संप्रभुता, स्वतंत्रताओं और समग्र समृद्धि के लिए खतरा” पाया है।
रुबियो ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप स्पष्ट हैं—अब यह स्वीकार्य नहीं है कि अमेरिकी जनता का खून-पसीना और धन इन संस्थाओं को भेजा जाए, और बदले में कुछ भी न मिले। करदाताओं के अरबों डॉलर विदेशी हितों पर खर्च होने के दिन खत्म हो गए हैं।”
उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों से अमेरिका हट रहा है, उनकी सूची यह दर्शाती है कि शांति और सहयोग के लिए बना व्यावहारिक ढांचा अब “वैश्विक शासन की एक फैली हुई संरचना” में बदल गया है, जो अक्सर प्रगतिशील विचारधारा से प्रभावित और राष्ट्रीय हितों से कटी हुई है।
“डीईआई अनिवार्यताओं से लेकर ‘लैंगिक समानता’ अभियानों और जलवायु कट्टरता तक, कई अंतरराष्ट्रीय संगठन अब एक वैश्विक परियोजना की सेवा कर रहे हैं, जो ‘इतिहास के अंत’ की अविश्वसनीय कल्पना पर आधारित है। ये संगठन अमेरिकी संप्रभुता को सीमित करने का प्रयास करते हैं। उनका काम उन्हीं अभिजात नेटवर्कों—बहुपक्षीय ‘एनजीओ-प्लेक्स’—द्वारा आगे बढ़ाया जाता है, जिन्हें हमने यूएसएआईडी को बंद कर dismantle करना शुरू किया है,” रुबियो ने कहा।
उन्होंने कहा, “हम उन संस्थाओं पर संसाधन, कूटनीतिक पूंजी और अपनी भागीदारी का वैधता-वजन खर्च नहीं करेंगे, जो हमारे हितों से अप्रासंगिक हैं या उनके टकराव में हैं। हम जड़ता और विचारधारा को छोड़कर विवेक और उद्देश्य को प्राथमिकता देंगे। जहां सहयोग हमारे लोगों के हित में होगा, हम करेंगे और जहां नहीं होगा, वहां मजबूती से खड़े रहेंगे।”
रुबियो ने कहा, “आज राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका 66 अमेरिका-विरोधी, बेकार या फिजूलखर्च अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकल रहा है। अन्य संगठनों की समीक्षा जारी है।”
उन्होंने जोड़ा, “ये कदम राष्ट्रपति ट्रंप के उस प्रमुख वादे को पूरा करते हैं कि हम वैश्विकतावादी नौकरशाहों को सब्सिडी देना बंद करेंगे, जो हमारे हितों के खिलाफ काम करते हैं। ट्रंप प्रशासन हमेशा अमेरिका और अमेरिकियों को पहले रखेगा।”
35 गैर-यूएन संगठनों और 31 यूएन इकाइयों की सूची में अंतरसरकारी जलवायु परिवर्तन पैनल (आईपीसीसी), अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, यूक्रेन में विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र, संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक मामलों का विभाग शामिल हैं।
इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी) — अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और कैरेबियन, एशिया और प्रशांत तथा पश्चिमी एशिया के लिए आर्थिक आयोग; सशस्त्र संघर्षों में बच्चों पर महासचिव के विशेष प्रतिनिधि का कार्यालय; संघर्ष में यौन हिंसा पर महासचिव के विशेष प्रतिनिधि का कार्यालय; शांति निर्माण आयोग, शांति निर्माण कोष, संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन; लैंगिक समानता और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए संयुक्त राष्ट्र इकाई; संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष भी शामिल हैं।
ट्रंप लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र और उसकी एजेंसियों के आलोचक रहे हैं। पिछले वर्ष 20 जनवरी को शपथ ग्रहण के कुछ ही घंटों के भीतर उन्होंने अमेरिका को एक बार फिर पेरिस जलवायु समझौते से बाहर निकालने का कार्यकारी आदेश जारी किया था, जो उनके पहले कार्यकाल जैसा ही कदम था।
अपने दूसरे कार्यकाल के कुछ ही हफ्तों के भीतर ट्रंप ने आदेश दिया कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भाग नहीं लेगा, संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की सदस्यता की समीक्षा करेगा और फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) की फंडिंग निलंबित करेगा।
पिछले वर्ष सितंबर में अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार विश्व नेताओं को संबोधित करने के लिए जब ट्रंप संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पहुंचे, तो उन्होंने विश्व संस्था पर तीखा हमला किया।
उन्होंने कहा, “संयुक्त राष्ट्र का उद्देश्य क्या है? यूएन में अपार संभावनाएं हैं—मैं हमेशा यह कहता आया हूं—लेकिन यह अपनी क्षमता के करीब भी नहीं पहुंच पा रहा। अधिकतर मामलों में, कम से कम अभी, वे बस एक कड़ी भाषा वाला पत्र लिखते हैं और फिर उस पर कोई कार्रवाई नहीं करते। खोखले शब्द युद्ध नहीं सुलझाते।”
पीटीआई YAS AMS
