ट्रंप प्रशासन का नया आदेश हजारों वैध शरणार्थियों की हिरासत का कारण बन सकता है

President Donald Trump speaks with Vice President JD Vance during a Board of Peace meeting at the U.S. Institute of Peace, Thursday, Feb. 19, 2026, in Washington.AP/PTI(AP02_19_2026_000712B)

मिनियापोलिस, 20 फरवरी (एपी) ट्रंप प्रशासन ने एक व्यापक नया आदेश जारी किया है, जिसके चलते अमेरिका में कानूनी रूप से रह रहे लेकिन अभी स्थायी निवास प्राप्त नहीं कर पाए हजारों शरणार्थियों की गिरफ्तारी हो सकती है, जिससे वर्षों से लागू कानूनी और आव्रजन सुरक्षा प्रावधान पलट सकते हैं।

मिनेसोटा में गुरुवार को संघीय अदालत की सुनवाई से पहले गृह सुरक्षा विभाग द्वारा दाखिल एक ज्ञापन में कहा गया है कि ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले शरणार्थियों को अमेरिका में प्रवेश के एक वर्ष बाद अपने आवेदन की समीक्षा के लिए संघीय हिरासत में लौटना होगा।

बुधवार को दाखिल ज्ञापन में कहा गया, “जांच और परीक्षण प्रक्रिया की अवधि के दौरान डीएचएस हिरासत बनाए रख सकता है।”

वकालत और पुनर्वास समूहों ने इस आदेश की कड़ी आलोचना की, जो संभवतः कानूनी चुनौतियों का सामना करेगा और बाइडेन प्रशासन के दौरान अमेरिका आए लगभग 2,00,000 शरणार्थियों के बीच भ्रम और भय पैदा कर सकता है।

यह आदेश ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू आव्रजन प्रतिबंधों की श्रृंखला में नवीनतम है, जिसने शरणार्थियों के प्रति लंबे समय से चली आ रही नीतियों को उलट दिया है, जिसमें देश में प्रवेश की संख्या में भारी कमी भी शामिल है। पिछले वर्ष के अंत में एसोसिएटेड प्रेस को प्राप्त एक ज्ञापन में कहा गया था कि प्रशासन बाइडेन प्रशासन के दौरान अमेरिका में प्रवेश पाने वाले सभी शरणार्थियों की समीक्षा की योजना बना रहा है, और उन वर्षों में आए शरणार्थियों के ग्रीन कार्ड अनुमोदन तुरंत निलंबित कर दिए गए हैं।

प्रशासन ने अपनी बदली हुई नीतियों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक चिंताओं का हवाला दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश में प्रवेश की अनुमति पाने से पहले ही शरणार्थियों की व्यापक जांच की जाती है।

नया आदेश उस समय आया जब अमेरिकी जिला न्यायाधीश जॉन टनहाइम ने गुरुवार को इस पर दलीलें सुनीं कि क्या उन्हें अस्थायी आदेश बढ़ाना चाहिए, जो मिनेसोटा में कानूनी रूप से रह रहे शरणार्थियों को गिरफ्तारी और निर्वासन से संरक्षण देता है। टनहाइम का आदेश केवल मिनेसोटा पर लागू होता है, लेकिन नए राष्ट्रीय आदेश के प्रभाव पर भी सुनवाई में व्यापक चर्चा हुई।

नए आदेश के तहत कितने लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता है, यह स्पष्ट नहीं था।

न्याय विभाग के वकील ब्रेंटली मेयर्स ने गुरुवार की सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार को अमेरिका में प्रवेश के एक वर्ष बाद शरणार्थियों को गिरफ्तार करने का अधिकार होना चाहिए, लेकिन संकेत दिया कि ऐसा हर बार नहीं होगा।

उन्होंने कहा, “यह डीएचएस का विवेकाधिकार है,” जिस पर मिनेसोटा के शरणार्थियों की ओर से पेश वकीलों ने संदेह व्यक्त किया।

टनहाइम ने गुरुवार को कोई फैसला नहीं सुनाया और कहा कि वह यह तय करने पर लिखित निर्णय जारी करेंगे कि अस्थायी आदेश बढ़ाया जाए या नहीं।

सुनवाई के बाद मिनेसोटा की डेमोक्रेटिक अमेरिकी सीनेटर टीना स्मिथ ने अदालत परिसर के बाहर संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकार अपनी नीति के समर्थन में “कानून या तथ्यों में कोई ठोस तर्क प्रस्तुत करने में विफल रही।” वह सुनवाई में मौजूद नहीं थीं, लेकिन कहा कि उन्हें इसकी जानकारी दी गई थी।

स्मिथ ने कहा, “और इसलिए हम न्याय के लिए अदालतों में लड़ाई जारी रखेंगे,” उनके साथ वकील और शरणार्थी अधिकार समर्थक, जिनमें अमेरिकी प्रतिनिधि इल्हान ओमर शामिल थीं, मौजूद थे।

वकालत समूहों ने नए आदेश की निंदा की। आव्रजन समर्थकों ने नई नीति का तुरंत विरोध किया, और शरणार्थियों तथा शरण चाहने वालों की सेवा करने वाले अंतरराष्ट्रीय यहूदी गैर-लाभकारी संगठन हियास ने इसे “इस देश में कानूनी रूप से मौजूद हजारों लोगों को हिरासत में लेने और संभावित रूप से निर्वासित करने का एक स्पष्ट प्रयास, जिनका स्वयं अमेरिकी सरकार ने स्वागत किया था” बताया। समूह की मुख्य कार्यकारी अधिकारी बेथ ओपेनहाइम ने एक बयान में कहा, “उन्हें सुरक्षा और अपना जीवन फिर से बसाने का अवसर देने का वादा किया गया था। इसके बजाय, डीएचएस अब उन्हें गिरफ्तारी और अनिश्चितकालीन हिरासत की धमकी दे रहा है।”

टनहाइम ने पिछले महीने सरकार को मिनेसोटा के शरणार्थियों को निशाना बनाने से रोक दिया था और कहा था कि मामले के वादी संभवतः अपने इस दावे में सफल होंगे “कि उनकी गिरफ्तारी और हिरासत, तथा उसे उचित ठहराने वाली नीति, अवैध है।” उनका 28 जनवरी का अस्थायी प्रतिबंध आदेश 25 फरवरी को समाप्त हो जाएगा, जब तक कि वे अधिक स्थायी प्रारंभिक निषेधाज्ञा जारी नहीं करते।

न्यायाधीश ने पहले सरकार के इस दावे को खारिज कर दिया था कि उसे उन शरणार्थियों को गिरफ्तार और हिरासत में लेने का कानूनी अधिकार है, जिन्होंने अमेरिका पहुंचने के एक वर्ष के भीतर अपने ग्रीन कार्ड प्राप्त नहीं किए हैं।

टनहाइम ने लिखा, “अनिवार्य हिरासत एक अव्यवहारिक परिणाम की ओर ले जाएगी,” क्योंकि शरणार्थी अमेरिका में एक वर्ष पूरा किए बिना ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन भी नहीं कर सकते। सरकार की व्याख्या का अर्थ है कि लगभग सभी शरणार्थियों को हिरासत का सामना करना पड़ेगा, जब तक कि आव्रजन अधिकारी ठीक एक वर्ष की अवधि पर उनकी समीक्षा न करें, जिसे उन्होंने “निरर्थक” बताया। जनवरी में सरकार द्वारा ऑपरेशन पैरिस शुरू किए जाने के बाद शरणार्थी अधिकार समूहों ने संघीय सरकार पर मुकदमा दायर किया। इसका पूरा नाम पोस्ट-एडमिशन रिफ्यूजी रीवेरिफिकेशन एंड इंटीग्रिटी स्ट्रेंथनिंग है।

इसे एक “व्यापक पहल” के रूप में प्रस्तुत किया गया था, जिसके तहत मिनेसोटा के 5,600 शरणार्थियों के मामलों की दोबारा जांच की जानी थी, जिन्हें अभी स्थायी निवासी दर्जा या ग्रीन कार्ड नहीं मिला था। एजेंसियों ने मिनेसोटा में सार्वजनिक कार्यक्रमों में धोखाधड़ी को इसका कारण बताया।

ऑपरेशन पैरिस ट्रंप प्रशासन की मिनेसोटा में आव्रजन कार्रवाई का हिस्सा था, जिसमें हजारों संघीय अधिकारियों की तैनाती शामिल थी। गृह सुरक्षा विभाग ने इसे अब तक का सबसे बड़ा आव्रजन प्रवर्तन अभियान बताया। संघीय एजेंटों द्वारा दो अमेरिकी नागरिकों को गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। व्हाइट हाउस के सीमा प्रभारी टॉम होमन ने पिछले सप्ताह घोषणा की कि यह अभियान समाप्त किया जा रहा है, हालांकि सीमित संघीय उपस्थिति बनी रहेगी। (एपी) एमएनके एमएनके

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