
नई दिल्ली/ईटानगर, 6 फरवरी (पीटीआई):
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया और कथित ट्रांस-अरुणाचल हाईवे मुआवजा घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत लगभग 2.2 करोड़ रुपये नकद जब्त किए, अधिकारियों ने बताया।
धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत ईटानगर में छह परिसरों पर, जबकि लिकाबली (लोअर सियांग जिला) और आलो (पश्चिम सियांग जिला) में एक-एक स्थान पर छापेमारी की गई। अधिकारियों के अनुसार, इन परिसरों में उपायुक्त, डीएलआरएसओ (जिला भूमि राजस्व एवं बंदोबस्त अधिकारी), मूल्यांकन अधिकारी, निजी लाभार्थी और बिचौलियों से जुड़े स्थान शामिल हैं।
ट्रांस-अरुणाचल हाईवे मुआवजा घोटाला मामला भूमि अधिग्रहण मुआवजे के आकलन, प्रमाणन और वितरण में सार्वजनिक सेवकों और निजी लाभार्थियों की संलिप्तता के साथ “बड़े पैमाने पर” अनियमितताओं से जुड़ा है।
यह परियोजना याचुली, ज़ीरो और रागा सेक्टरों में फैले 157.70 किलोमीटर लंबे मार्ग को कवर करती है।
जांच में पाया गया कि ज़ीरो के उपायुक्त ने प्रारंभ में पोटिन-बोपी खंड के लिए 289.40 करोड़ रुपये का मुआवजा अनुमान तैयार किया था।
हालांकि, राज्य-स्तरीय बैठक में मुआवजा पैकेज को फ्रीज कर 198.56 करोड़ रुपये तक सीमित कर दिया गया, ईडी अधिकारियों ने बताया।
मुआवजा राशि के वितरण के दौरान धनराशि को बचत खातों में ‘डायवर्ट’ किया गया और कई चेक “फर्जी” लाभार्थियों के नाम जारी किए गए, जिससे सरकारी खजाने को 44 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, उन्होंने कहा।
यह सब ट्रांस-अरुणाचल हाईवे (पोटिन-बोपी) परियोजना के याजाली सेक्टर में संरचनाओं के बढ़ा-चढ़ाकर और काल्पनिक आकलन तैयार कर उन्हें प्रमाणित करने के जरिए किया गया। इसमें अस्तित्वहीन संरचनाओं और अयोग्य लाभार्थियों को शामिल किया गया, ईडी ने बताया।
अधिकारियों के अनुसार, एक “फर्जी” लाभार्थी से जुड़े परिसर से 2.2 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
— पीटीआई (एनईएस, डीवी, डीवी)
