‘ट्रैप्ड’ और ‘ओह माय गॉड’ जैसी न लगे, इसका खास ध्यान रखा: ‘लालो’ के निर्देशक अंकित सखिया

Laalo: Krishna Sada Sahaayate

मुंबई, 9 जनवरी (पीटीआई)

गुजराती भाषा की फिल्म “लालो – श्री कृष्ण सदा सहायते” दर्शकों को “ट्रैप्ड” और “ओह माय गॉड” की याद दिला सकती है, लेकिन निर्देशक अंकित सखिया का कहना है कि उन्होंने जानबूझकर इन दोनों हिंदी फिल्मों से प्रभावित न होने का फैसला किया।

यह फिल्म लालो (करण जोशी) नामक एक रिक्शा चालक की कहानी है, जो चोरी के इरादे से एक घर में घुसता है और वहीं फंस जाता है। इसके बाद कहानी में चौंकाने वाला मोड़ आता है, जब भगवान कृष्ण (श्रुहद गोस्वामी) वहां प्रकट होते हैं।

सखिया ने बताया कि जब वह सह-लेखकों क्रुशांश वाजा और विक्की पूर्णिमा के साथ पटकथा लिख रहे थे, तब उन्होंने “ट्रैप्ड” और “ओह माय गॉड” दोनों फिल्में देखीं।

उन्होंने कहा, “हमने पहले ‘ट्रैप्ड’ देखी और फिर ‘ओह माय गॉड’। हमने सबको यह निर्देश दिया कि क्या नहीं करना है, ताकि फिल्म वैसी न लगे। आमतौर पर फिल्में अवचेतन रूप से प्रभावित कर देती हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “अभिनय या निर्देशन के स्तर पर कुछ भी समान नहीं दिखना चाहिए और ऐसा नहीं लगना चाहिए कि हमने कुछ कॉपी किया है। दृश्य-दर-दृश्य नकल बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।”

ट्रेलर रिलीज़ होने के बाद कई लोगों ने कहा कि फिल्म “ट्रैप्ड” और “ओह माय गॉड” जैसी लगती है। इस पर सखिया ने कहा, “हमें पहले से पता था कि ऐसा होगा। लेकिन फिल्म देखने के बाद किसी ने ऐसा नहीं कहा। अगर कहते, तो हम असफल हो जाते।”

10 अक्टूबर को रिलीज़ हुई “लालो” ने गुजराती सिनेमा के इतिहास में 100 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर सबसे ज्यादा कमाने वाली फिल्म बनने का रिकॉर्ड बनाया। फिल्म का हिंदी संस्करण शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुआ।