डबल-डेकर बस की छत से लेकर फ्लैट के अंदर तक: जब अतीत में मुंबई को ‘बंधक’ बनाया गया

मुंबई, 30 अक्टूबर (पीटीआई): मुंबई ने गुरुवार को एक तनावपूर्ण स्थिति देखी, जहाँ संभवतः पहली बार बड़ी संख्या में बच्चों को बंधक बनाया गया था। हालांकि, यह महानगर बंधक संकटों से अपरिचित नहीं है, जिन्होंने अतीत में इसे कगार पर धकेल दिया और गैर-आतंकवादी मामलों में पुलिस की दक्षता की परीक्षा ली।

हालिया और पुरानी बंधक संकट की घटनाएँ

1. Powai स्टूडियो बंधक संकट (2025)

  1. घटना: पुलिस ने लगभग तीन घंटे तक चली नाटकीय बंधक स्थिति को सफलतापूर्वक समाप्त किया, जिसमें 17 बच्चों और दो वयस्कों को सुरक्षित बचा लिया गया। पवई इलाके के एक स्टूडियो में बंधक बनाने वाले व्यक्ति की पुलिस कार्रवाई के दौरान लगी गोली से मौत हो गई।
  2. विवरण: यह तनावपूर्ण ड्रामा दोपहर करीब 1:30 बजे तब शुरू हुआ जब पवई पुलिस स्टेशन को रोहित आर्य (50) नामक व्यक्ति द्वारा महावीर क्लासिक बिल्डिंग में आर ए स्टूडियो के अंदर बच्चों को बंधक बनाने की सूचना मिली।
  3. बंधक: 10 से 12 साल की उम्र के ये बच्चे (लड़के और लड़कियां) एक वेब सीरीज के ऑडिशन के लिए स्टूडियो आए थे, जो दो दिनों से चल रहा था। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि हाल के वर्षों में यह अपनी तरह का पहला मामला हो सकता है, जिसमें इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को बंधक बनाया गया हो।

2. अंधेरी फ्लैट बंधक संकट (मार्च 2010)

  1. घटना: उपनगरीय अंधेरी (पश्चिम) में एक सेवानिवृत्त सीमा शुल्क अधिकारी, हरीश मारोलिया (60) ने एक 14 वर्षीय लड़की, हिमानी को अपने फ्लैट में बंधक बना लिया था। अधिकारी ने याद किया कि मारोलिया ने यह कदम उस हाउसिंग सोसाइटी के सदस्यों के साथ हुए झगड़े के बाद उठाया था, जहां वे रहते थे।
  2. परिणाम: बंधक ड्रामा का हिंसक अंत हुआ जब मारोलिया ने किशोरी की हत्या कर दी और बाद में पुलिस ने उसे गोली मार दी।

3. डबल-डेकर बस बंधक संकट (नवंबर 2008)

  1. घटना: बिहार के 25 वर्षीय बंदूकधारी, राहुल राज, ने अंधेरी से कुर्ला के बैल बाज़ार तक यात्रा कर रही एक डबल-डेकर नागरिक बस में यात्रियों को बंधक बना लिया।
  2. मांग: जब पुलिस ने राज को आत्मसमर्पण करने को कहा, तो उसने एक नोट फेंक दिया जिस पर उसने लिखा था कि वह महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे को “मारने” आया था, जिनकी पार्टी मुंबई में उत्तर भारतीयों को निशाना बनाते हुए एक प्रवासी-विरोधी आंदोलन चला रही थी।
  3. परिणाम: पुलिस ने 25 वर्षीय बंदूकधारी को गोली मारकर हत्या कर दी, जिससे संकट का खूनी अंत हुआ।

बंधक संकट से निपटने में विशेषज्ञ की राय

  1. ACP शैलनी शर्मा: नागपुर की सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) शैलनी शर्मा ने फोन पर पीटीआई से बात करते हुए समझाया, “बंधक स्थितियों में, सबसे महत्वपूर्ण बात जान बचाना और न्यूनतम क्षति सुनिश्चित करना है। बातचीत इन दो उद्देश्यों को ध्यान में रखकर की जाती है।”
  2. विशेषज्ञ प्रशिक्षण: शर्मा 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद मुंबई पुलिस की पहली महिला अधिकारी थीं, जिन्हें बंधक स्थितियों को संभालने के लिए लंदन में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था। उन्हें 2022 में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) कमांडो को बंधक परिदृश्यों को सफलतापूर्वक संभालने का प्रशिक्षण देने के लिए भी बुलाया गया था।
  3. निर्णय लेना: शर्मा ने कहा, “जब बंधक बनाने वाले के साथ बातचीत में कोई प्रगति नहीं होती है, तो ऑपरेशन टीम समय की आवश्यकता के अनुसार निर्णय लेती है।”
  4. 2010 घटना में भूमिका: 2010 की अंधेरी बंधक घटना में शर्मा को मारोलिया से बातचीत करने के लिए बुलाया गया था, लेकिन तब तक एक पुलिस टीम फ्लैट के अंदर घुस चुकी थी जहां उसने लड़की को बंधक बनाया था और गोली चला दी थी।

चूंकि मुंबई ने ऐसी कई चुनौतियाँ देखी हैं, क्या आप जानना चाहेंगे कि 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद मुंबई पुलिस ने अपनी बंधक संकट से निपटने की तैयारियों में क्या प्रमुख बदलाव किए हैं?

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