तमिलनाडु में INDI गठबंधन में दरारें, कांग्रेस असमंजस में दिख रही है: सीतारमण

New Delhi: Union Finance Minister Nirmala Sitharaman during an interview with PTI, in New Delhi, Tuesday, Feb. 3, 2026. (PTI Photo/Arun Sharma) (PTI02_03_2026_000327B)

नई दिल्ली, 4 फरवरी (पीटीआई) तमिलनाडु में INDI गठबंधन के भीतर दरारों का संकेत देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने डीएमके-नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रति कांग्रेस की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस बात पर असमंजस में है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव अकेले लड़े या डीएमके के साथ गठबंधन में।

पीटीआई वीडियो को दिए एक साक्षात्कार में सीतारमण ने कहा कि अभिनेता विजय की राजनीति में एंट्री ने “तमिलनाडु के चुनावी माहौल को गर्मा दिया है”, लेकिन उनके प्रदर्शन का असली आकलन चुनाव नतीजों से ही होगा। उन्होंने यह भी सवाल किया कि पांच साल का पूरा कार्यकाल और अच्छे शासन के दावों के बावजूद सत्तारूढ़ डीएमके “असुरक्षित” क्यों नजर आ रही है।

सीतारमण ने डीएमके सरकार पर कानून-व्यवस्था के मुद्दों से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी, अनुसूचित जातियों और महिलाओं के खिलाफ अपराध, तथा विश्वविद्यालय परिसरों में बढ़ती असुरक्षा जैसे मामलों पर सरकार जवाब देने में नाकाम रही है।

उन्होंने कहा, “ये वे सवाल हैं, जो किसी भी विपक्ष को उठाने चाहिए।”

तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता विजय के प्रवेश पर टिप्पणी करते हुए सीतारमण ने कहा कि उनकी मौजूदगी ने चुनावों में रुचि बढ़ा दी है और सत्तारूढ़ डीएमके को असहज कर दिया है।

उन्होंने कहा, “आखिरकार चुनाव के नतीजे ही सब कुछ साबित करेंगे, लेकिन मुझे लगता है कि उन्होंने चुनावी माहौल को झकझोर दिया है। आज तमिलनाडु के चुनावों में जो दिलचस्पी दिख रही है, वह काफी हद तक उनके और उनकी पार्टी की गतिविधियों की वजह से है।” उन्होंने जोड़ा कि विजय की एंट्री से डीएमके “असुरक्षित” महसूस कर रही है।

बीजेपी द्वारा विजय को साधने की अटकलों पर सीतारमण ने कहा कि राजनीति “किसे किसकी जरूरत है” का खेल नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई भी आ सकता है, जबकि एनडीए गठबंधन एकजुट है और आगे बढ़ रहा है।

हालांकि, उन्होंने INDI गठबंधन पर निशाना साधते हुए तमिलनाडु में कांग्रेस की भूमिका और प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए। सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस गठबंधनों पर निर्भर दिखती है और चुनाव से महीनों पहले भी अपनी राजनीतिक दिशा को लेकर अनिश्चित है।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस और डीएमके—दोनों से सवाल पूछे जाने चाहिए। पांच साल तक साथ सत्ता में रहने के बाद भी गठबंधन जारी रखने में हिचक क्यों?”

उन्होंने कहा, “पांच साल पूरे होने के बाद, जब वे अच्छे शासन और राज्य के विकास के दावे कर रहे हैं, तो फिर यह असुरक्षा क्यों? चुनावी राजनीति में कोई भी आ सकता है—फिल्म अभिनेता, पेशेवर या कोई और। ऐसे में विजय का आना बिल्कुल ठीक है। मतदाताओं के पास विकल्प है।”

सीतारमण ने डीएमके गठबंधन पर तीखा हमला करते हुए कहा कि राज्य में “कानूनहीनता है और नशीले पदार्थों से जुड़े अपराध बिना सजा के रह जा रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “जो पार्टी सामाजिक न्याय की बात करती है, वहां अनुसूचित जातियों और समाज के कमजोर वर्गों की महिलाओं के खिलाफ अपराधों को दंडित नहीं किया जा रहा।” उन्होंने यह भी कहा कि नशा माफिया और सत्तारूढ़ व्यवस्था के ऊपरी स्तरों के बीच करीबी संबंधों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

उन्होंने कहा, “इनमें से किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया गया। तमिलनाडु में विश्वविद्यालय असुरक्षित होते जा रहे हैं। ऐसा पहले कभी नहीं था। पांच साल सत्ता में रहने के बावजूद डीएमके इन सवालों का जवाब नहीं दे पाई है।”

कांग्रेस की डीएमके के साथ गठबंधन जारी रखने की मंशा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी बंटी हुई नजर आती है।

उन्होंने कहा, “क्या वे डीएमके के साथ जाना चाहते हैं, या अकेले रहना चाहते हैं, या किसी और के साथ? चुनाव इतने नजदीक हैं और फिर भी इन मुद्दों पर मंथन चल रहा है। INDI गठबंधन क्या वाकई कायम है?”

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी होते हुए भी सत्ता में नहीं आ सकी और गठबंधनों पर निर्भर रही है।

उन्होंने सवाल किया, “जब चुनाव इतने करीब हैं, तब यह दुविधा क्यों कि किसके साथ जाना है? पांच साल तक साथ शासन किया, फिर अब विभाजन क्यों?”

सीतारमण ने जोर देकर कहा कि बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन “पूरी तरह एकजुट होकर आगे बढ़ रहा है।”

दक्षिण भारत में बीजेपी की सीमित सफलता पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी को उत्तर भारतीय और हिंदी-केन्द्रित बताने वाली “झूठी प्रचारणा” को खत्म करने में समय लगेगा।

गोवा और पूर्वोत्तर में बीजेपी की बढ़त का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सांप्रदायिकता के आरोप टिकते नहीं हैं। उन्होंने पूछा, “अगर बीजेपी सांप्रदायिक होती, तो क्या ये राज्य उसे स्वीकार करते?”

तमिल पहचान और क्षेत्रीय गौरव पर उठे सवालों के जवाब में सीतारमण ने इस धारणा को खारिज किया कि बीजेपी में तमिल प्रतिनिधित्व नहीं है।

उन्होंने कहा, “मैं खुद तमिल हूं,” और राज्य से जुड़े कई बीजेपी नेताओं, जिनमें भारत के उपराष्ट्रपति भी शामिल हैं, का उदाहरण दिया।

राज्य की राजनीति में बड़ी भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर सीतारमण ने कहा कि वह पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों से संतुष्ट हैं और जरूरत पड़ने पर चुनाव प्रचार करेंगी।

उन्होंने कहा, “मैं अपनी पार्टी का काम करती हूं।”