रुद्रपुर, 13 जनवरी (भाषा)। भूजल स्तर में लगातार गिरावट से निपटने के लिए, प्रशासन उत्तराखंड के तराई क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन या गैर-मौसमी धान की खेती पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है।
उधम सिंह नगर के जिला मजिस्ट्रेट नितिन सिंह भदौरिया ने संकेत दिया है कि संभावित प्रतिबंध, जो 1 फरवरी से 30 अप्रैल तक प्रभावी होगा, नैनीताल और हरिद्वार जिलों के कुछ हिस्सों सहित राज्य के पूरे तराई क्षेत्र में लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष ग्रीष्मकालीन धान की खेती की अनुमति नहीं दी जाएगी।
हिमालय की तलहटी में स्थित उत्तराखंड के तराई क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा उधम सिंह नगर जिले में आता है, जिसे राज्य के ‘अनाज भंडार’ के रूप में जाना जाता है।
यदि प्रतिबंध लागू किया जाता है, तो जिले के लगभग 15,000 किसान प्रभावित होंगे।
2024 में, प्रशासन ने ग्रीष्मकालीन धान की खेती पर भी प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन बाद में किसानों के अनुरोध पर इसे अस्थायी रूप से हटा लिया गया था।
हालांकि, इस बार प्रशासन भूजल संरक्षण पर सख्त रुख अपनाने के लिए तैयार है।
इस बीच, धान किसानों का कहना है कि वे वर्षों से ग्रीष्मकालीन धान की खेती कर रहे हैं, जिससे उन्हें हर साल एक अतिरिक्त फसल मिलती है। किसानों ने कहा कि अगर प्रतिबंध लगाया जाता है, तो यह उनकी आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा।
हालांकि प्रतिबंध के संबंध में प्रशासन द्वारा अभी तक कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन जारी संकेतों ने किसानों को इस बात को लेकर उलझन में डाल दिया है कि इस बार बेमौसम धान की बुवाई की जाए या नहीं।
कृषि और जल संरक्षण पर बहस के बीच तराई क्षेत्र के किसान प्रशासन के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं। पीटीआई डीपीटी डीआरआर
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