ताइवान को लेकर जापान के साथ बढ़ते तनाव के बीच दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति चीन दौरे पर

South Korean President Lee Jae Myung and his wife Kim Hea Kyung prepare to leave for China at the Seoul airport in Seongnam, South Korea, Sunday, Jan. 4, 2026. AP/PTI(AP01_04_2026_000023B)

हांगकांग, 4 जनवरी (एपी): दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग रविवार को चीन पहुंचे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब ताइवान को लेकर चीन और जापान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। चीन ताइवान को अपना संप्रभु क्षेत्र मानता है, जबकि ताइवान एक स्वशासित द्वीप है।

ली का यह चार दिवसीय दौरा जून में पदभार संभालने के बाद उनका पहला चीन दौरा है। यह यात्रा ऐसे समय पर हो रही है, जब नवंबर में जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के उस बयान के बाद चीन-जापान संबंधों में तनाव बढ़ गया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि चीन ताइवान के खिलाफ कोई कदम उठाता है तो जापान की सेना हस्तक्षेप कर सकती है।

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने रविवार दोपहर बताया कि ली बीजिंग पहुंचे। अपने प्रवास के दौरान ली अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। यह दोनों नेताओं की दो महीनों में दूसरी मुलाकात होगी।

चीन के साथ संबंधों के प्रति प्रतिबद्धता का संकेत

दौरे से पहले ली ने सियोल स्थित राष्ट्रपति कार्यालय चेओंग वा डे (ब्लू हाउस) में चीन के सरकारी प्रसारक सीसीटीवी को एक साक्षात्कार दिया। राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, ली ने कहा कि यह राष्ट्रपति भवन में दिया गया उनका पहला साक्षात्कार था और उन्हें उम्मीद है कि लोग समझेंगे कि उनकी सरकार बीजिंग और सियोल के संबंधों को महत्व देती है।

सीसीटीवी की शुक्रवार की रिपोर्ट के अनुसार, ली ने ताइवान के मामले में “वन-चाइना” नीति के प्रति दक्षिण कोरिया की निरंतर प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि बीजिंग-सियोल संबंधों का स्वस्थ विकास आपसी सम्मान पर निर्भर करता है। ली ने राष्ट्रपति शी को “वास्तव में भरोसेमंद पड़ोसी” भी बताया।

पिछले सप्ताह चीन ने ताइवान के आसपास दो दिनों तक बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास किए थे, जिन्हें उसने अलगाववादी और “बाहरी हस्तक्षेप” शक्तियों के खिलाफ चेतावनी बताया। उसी समय, चीनी विदेश मंत्रालय ने ताइवान की सत्तारूढ़ पार्टी पर अमेरिका का समर्थन मांगकर स्वतंत्रता की कोशिश करने का आरोप लगाया था।

दिसंबर में अमेरिका द्वारा ताइवान को बड़े पैमाने पर हथियार बेचने की योजना से बीजिंग नाराज हो गया था, जिसके बाद चीन ने अमेरिका की 20 रक्षा-संबंधी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए।

ली ने कहा कि अमेरिका के साथ दक्षिण कोरिया का सहयोग, जो उसका सैन्य सहयोगी है, इसका मतलब यह नहीं है कि दक्षिण कोरिया-चीन संबंध टकराव की ओर बढ़ें। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अतीत की गलतफहमियों ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है।

सीसीटीवी के अनुसार, ली ने कहा, “चीन की यह यात्रा इन पुरानी गलतफहमियों या विरोधाभासों को कम करने या समाप्त करने और दक्षिण कोरिया-चीन संबंधों को एक नए स्तर तक उठाने के उद्देश्य से है।”

कोरियाई प्रायद्वीप और आर्थिक संबंधों पर चर्चा

दक्षिण कोरिया और अमेरिका लंबे समय से चीन से आग्रह करते रहे हैं कि वह उत्तर कोरिया पर अपना प्रभाव इस्तेमाल करे, ताकि वह बातचीत की मेज पर लौटे या अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़े। चीन उत्तर कोरिया का पारंपरिक सहयोगी और प्रमुख आर्थिक सहारा माना जाता है।

हालांकि, चीन पर यह संदेह भी रहा है कि वह उत्तर कोरिया पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को पूरी तरह लागू नहीं करता और गुप्त रूप से मदद भेजता है, ताकि वह अमेरिकी प्रभाव के खिलाफ कोरियाई प्रायद्वीप पर एक ढाल बना रहे।

रविवार को उत्तर कोरिया ने समुद्र की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, दक्षिण कोरिया की सेना ने बताया। यह उसके आगामी सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस से पहले हथियारों का नवीनतम प्रदर्शन है।

दक्षिण कोरियाई अधिकारियों के अनुसार, ली की यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति बहाल करने के तरीकों पर चर्चा करना है।

सोमवार को होने वाले शिखर सम्मेलन में ली और शी सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों पर “ठोस और गहन चर्चा” करेंगे। यह जानकारी दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार वी सुङ-लाक ने शुक्रवार को दी। मंगलवार को ली चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के अध्यक्ष झाओ लेजी और प्रधानमंत्री ली छ्यांग से भी मुलाकात करेंगे।

सलाहकार वी के अनुसार, दक्षिण कोरिया इस यात्रा के दौरान चीन से कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति को बढ़ावा देने के प्रयासों में “रचनात्मक भूमिका” निभाने का आग्रह भी करेगा। नवंबर में हुई पिछली बातचीत में ली पहले ही शी से उत्तर कोरिया को वार्ता के लिए राजी करने में अधिक प्रयास करने का अनुरोध कर चुके हैं।

वी ने कहा कि दक्षिण कोरिया ऐसे ठोस परिणामों की भी कोशिश करेगा, जिनसे दोनों देशों के आम नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ हो सके।

(एपी) आरडी आरडी

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