
नई दिल्ली, 23 जनवरी (पीटीआई): दिल्ली हाईकोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में तुर्कमान गेट इलाके में फैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुई हिंसा के मामले में एक आरोपी को दी गई जमानत को रद्द कर दिया है। आरोप है कि आरोपी पथराव करने वाली भीड़ का हिस्सा था।
मामले को पुनर्विचार के लिए ट्रायल कोर्ट को वापस भेजते हुए न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने कहा कि किसी व्यक्ति को दी गई स्वतंत्रता में हस्तक्षेप को लेकर अदालत बेहद सतर्क रहती है, लेकिन यह एक “असाधारण” मामला है, क्योंकि उबेदुल्लाह नामक स्ट्रीट वेंडर को “संक्षिप्त और बिना कारण बताए गए” आदेश के जरिए जमानत दी गई थी।
ट्रायल कोर्ट ने 20 जनवरी को उबेदुल्लाह को जमानत दी थी।
न्यायमूर्ति जालान ने कहा कि जमानत आदेश में अभियोजन पक्ष की दलीलों पर पर्याप्त रूप से विचार नहीं किया गया और न ही जमानत से जुड़े कारकों का कोई प्रथम दृष्टया या संक्षिप्त विश्लेषण किया गया।
अदालत ने 21 जनवरी को पारित अपने आदेश में कहा कि पर्याप्त कारणों के अभाव में जमानत आदेश को रद्द किया जाता है और मामले को सत्र अदालत को वापस भेजा जाता है। ट्रायल कोर्ट अब 23 जनवरी को जमानत याचिका पर पुनर्विचार करेगा।
अभियोजन पक्ष ने ट्रायल कोर्ट में जमानत का विरोध करते हुए मुख्य रूप से सीसीटीवी फुटेज और एक सह-आरोपी के खुलासे पर भरोसा किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उबेदुल्लाह हिंसक भीड़ का हिस्सा था, जिसने पुलिस को रोका, पथराव किया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
वहीं, आरोपी के वकील ने दलील दी कि उसके खिलाफ पूरा मामला केवल “फिशिंग एक्सपीडिशन” है।
यह मामला 6 और 7 जनवरी की मध्यरात्रि को रामलीला मैदान क्षेत्र में स्थित मस्जिद के पास चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है।
पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई गई थी कि तुर्कमान गेट के सामने स्थित मस्जिद को गिराया जा रहा है, जिसके बाद लोग मौके पर एकत्र हो गए। पुलिस ने बताया कि करीब 150-200 लोगों ने पुलिस और एमसीडी कर्मियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकीं, जिससे इलाके के थाना प्रभारी सहित छह पुलिसकर्मी घायल हो गए।
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