तेज और लापरवाही से गाड़ी चलाने वालों की मौत पर बीमा कंपनी मुआवजा देने की जिम्मेदार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली, 3 जुलाई (पीटीआई) — सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बीमा कंपनियां उन लोगों की मौत के मामलों में मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, जो खुद तेज और लापरवाही से गाड़ी चला रहे थे।

न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और आर महादेवन की पीठ ने एक ऐसे मामले में 80 लाख रुपये का मुआवजा देने से इनकार कर दिया, जिसमें एक व्यक्ति की तेज रफ्तार से कार चलाते समय मौत हो गई थी और उसकी पत्नी, बेटा और माता-पिता ने मुआवजे की मांग की थी।

शीर्ष अदालत ने कर्नाटक हाईकोर्ट के 23 नवंबर 2023 के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें मृतक के कानूनी वारिसों द्वारा दायर मुआवजे की याचिका खारिज कर दी गई थी।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, “हम हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं। इसलिए, विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है।”

मामले के अनुसार, 18 जून 2014 को एन एस रविशा मल्लासंद्रा गांव से अरसीकेरे टाउन जा रहे थे, तभी हादसा हुआ। कार में उनके पिता, बहन और उसके बच्चे भी थे।

कोर्ट ने पाया कि रविशा ने ट्रैफिक नियमों का पालन किए बिना लापरवाही से गाड़ी चलाई और नियंत्रण खो बैठने के बाद कार पलट गई, जिससे उनकी मौत हो गई।

हाईकोर्ट ने कहा था कि “चूंकि दुर्घटना मृतक की अपनी लापरवाही और तेज गाड़ी चलाने के कारण हुई, और वह स्वयं दोषी था, इसलिए उसके कानूनी वारिस उसकी मौत पर मुआवजे का दावा नहीं कर सकते। अन्यथा यह उस व्यक्ति को उसके अपने गलत काम के लिए मुआवजा देने जैसा होगा।”