
बैंकॉक, 22 दिसंबर (एपी): थाईलैंड और कंबोडिया के बीच जारी सीमा संघर्ष, जो दो सप्ताह पहले घातक झड़पों में बदल गया था, पर चर्चा के लिए दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के विदेश मंत्री सोमवार को मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में एक विशेष बैठक के लिए एकत्र हुए।
यह इस वर्ष दूसरी बार है जब क्षेत्रीय संगठन दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संघ (आसियान) अपने दो सदस्य देशों के बीच तनाव कम करने के लिए एक मंच के रूप में सामने आया है।
नया संघर्ष उस युद्धविराम को पटरी से उतार गया, जिसे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बढ़ावा दिया था और जिसके तहत जुलाई में पांच दिनों तक चली लड़ाई समाप्त हुई थी।
यह समझौता मलेशिया की मध्यस्थता से हुआ था और ट्रंप के दबाव में आगे बढ़ा था, जिन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि थाईलैंड और कंबोडिया सहमत नहीं हुए तो व्यापारिक रियायतें रोक दी जाएंगी। इस युद्धविराम को अक्टूबर में मलेशिया में हुई एक क्षेत्रीय शिखर बैठक में अधिक विस्तार से औपचारिक रूप दिया गया था, जिसमें ट्रंप भी शामिल हुए थे।
इस संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका के विदेश विभाग ने रविवार को एक बयान जारी कर थाईलैंड और कंबोडिया से “शत्रुता समाप्त करने, भारी हथियारों को वापस लेने, बारूदी सुरंगें बिछाना बंद करने और कुआलालंपुर शांति समझौते को पूरी तरह लागू करने” का आह्वान किया। इस समझौते में मानवीय बारूदी सुरंग हटाने की प्रक्रिया तेज करने और सीमा मुद्दों को सुलझाने की व्यवस्थाएं शामिल हैं।
थाईलैंड के विदेश मंत्री सिहासक फुआंगकेओ ने रविवार को सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात की और “युद्धविराम की दिशा में काम करने की थाईलैंड की मजबूत मंशा और आगे की स्पष्ट रूपरेखा” से उन्हें अवगत कराया। उन्होंने कहा कि थाईलैंड सोमवार को कुआलालंपुर में होने वाली बैठक में रचनात्मक रूप से हिस्सा लेगा।
कंबोडिया के विदेश मंत्री प्राक सोखोन भी इस बैठक में शामिल होंगे। कंबोडिया के विदेश मंत्रालय ने रविवार को एक बयान में कहा कि देश “मतभेदों और विवादों को शांतिपूर्ण तरीकों, संवाद और कूटनीति के जरिए सुलझाने” की अपनी स्थिति पर कायम है। यह संघर्ष दोनों देशों की साझा सीमा पर स्थित कुछ इलाकों को लेकर दावे-प्रतिदावों का परिणाम है।
लड़ाई का ताजा दौर 8 दिसंबर को शुरू हुआ, जब एक सीमा झड़प में दो थाई सैनिक घायल हो गए थे। इसके बाद कई मोर्चों पर संघर्ष भड़क उठा। थाईलैंड ने एफ-16 लड़ाकू विमानों से कंबोडिया में हवाई हमले किए, जबकि कंबोडिया ने ट्रक पर लगे लॉन्चरों से हजारों मध्यम दूरी के बीएम-21 रॉकेट दागे, जो एक साथ 40 रॉकेट छोड़ सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में सीमा के दोनों ओर दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हुई है, जबकि पांच लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं।
अक्टूबर में हुए युद्धविराम के तहत थाईलैंड को हिरासत में लिए गए 18 कंबोडियाई सैनिकों को रिहा करना था और दोनों देशों को सीमा से भारी हथियारों और बारूदी सुरंगों को हटाने की प्रक्रिया शुरू करनी थी। हालांकि, दोनों देशों के बीच तीखा प्रचार युद्ध जारी रहा और सीमित स्तर पर सीमा पार हिंसा भी होती रही।
बारूदी सुरंगों के विस्फोट थाईलैंड के लिए विशेष रूप से संवेदनशील मुद्दा बने हुए हैं। थाईलैंड ने आरोप लगाया है कि कंबोडिया ने नई सुरंगें बिछाईं, जिनसे सीमा पर गश्त कर रहे उसके सैनिक घायल हुए, और इसको लेकर उसने कई विरोध दर्ज कराए हैं। कंबोडिया का कहना है कि ये सुरंगें उसके दशकों लंबे गृहयुद्ध के अवशेष हैं, जो 1999 में समाप्त हुआ था।
थाई नौसेना ने रविवार को कहा कि अग्रिम मोर्चे पर तैनात उसका एक मरीन सैनिक बारूदी सुरंग पर पैर पड़ने से दाहिने पैर में गंभीर रूप से घायल हो गया।
नौसेना ने यह भी दावा किया कि उसने एक ऐसे इलाके को सुरक्षित करते समय बड़ी संख्या में छोड़े गए हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की, जिसे कंबोडियाई गढ़ बताया गया है। इससे “थाई सैनिकों के खिलाफ एंटी-पर्सनल बारूदी सुरंगों के जानबूझकर नियोजन और उपयोग” का संकेत मिलता है।
थाई विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह कंबोडिया और एंटी-पर्सनल माइन बैन कन्वेंशन (जिसे ओटावा कन्वेंशन भी कहा जाता है) के वर्तमान अध्यक्ष जाम्बिया को विरोध पत्र भेजेगा, ताकि कन्वेंशन की प्रक्रियाओं के तहत आगे की कार्रवाई की जा सके।
कंबोडिया ने थाईलैंड के इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
