थाईलैंड में समय से पहले चुनाव, सत्ता के लिए तीन प्रमुख दलों में मुकाबला

Police officers and Volunteers check ballots for Sunday's general election in Bangkok, Thailand, Saturday, Feb. 7, 2026. AP/PTI(AP02_07_2026_000025B)

बैंकॉक, 8 फरवरी (एपी)

थाईलैंड में रविवार को समय से पहले आम चुनाव के लिए मतदान हुआ, जिसे प्रगतिशील, लोकलुभावन और पारंपरिक संरक्षक-आधारित राजनीति की तीन अलग-अलग धाराओं के बीच त्रिकोणीय मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है।

53 मिलियन पंजीकृत मतदाताओं का समर्थन पाने की जंग ऐसे समय में हो रही है, जब देश की आर्थिक वृद्धि धीमी है और राष्ट्रवादी भावना तेज है। हालांकि 50 से अधिक दल चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन केवल तीन—पीपुल्स पार्टी, भूमजैथाई और फेउ थाई—के पास देशव्यापी संगठन और लोकप्रियता है, जिससे वे निर्णायक जनादेश हासिल कर सकते हैं।

500 निर्वाचित सांसदों में साधारण बहुमत से अगला प्रधानमंत्री चुना जाएगा।

स्पष्ट बहुमत की उम्मीद नहीं

स्थानीय सर्वेक्षण लगातार संकेत दे रहे हैं कि किसी भी एक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा, जिससे गठबंधन सरकार बनने की संभावना है।

हालांकि प्रगतिशील पीपुल्स पार्टी के सबसे अधिक सीटें जीतने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन उसकी सुधारवादी राजनीति उसके प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों से मेल नहीं खाती। ऐसे में वे आपस में हाथ मिलाकर उसे सत्ता से बाहर रख सकते हैं।

पीपुल्स पार्टी का बदला हुआ रुख

नत्थाफोंग रूएंगपान्यावुत के नेतृत्व वाली पीपुल्स पार्टी, मूव फॉरवर्ड पार्टी की उत्तराधिकारी है, जिसने 2023 में सबसे अधिक निचले सदन की सीटें जीती थीं, लेकिन रूढ़िवादी सांसदों ने उसे सरकार बनाने से रोक दिया और बाद में पार्टी को भंग कर दिया गया।

यह पार्टी अब भी सेना, पुलिस और न्यायपालिका में व्यापक सुधारों का वादा करती है, जिससे युवा और शहरी मतदाता आकर्षित होते हैं। हालांकि कानूनी सीमाओं के कारण उसने राजशाही की आलोचना पर कठोर सजा देने वाले कानून में सुधार की मांग फिलहाल अलग रख दी है और आर्थिक मुद्दों पर ज्यादा जोर दिया है।

राजनीति को नरम करना उसके मूल समर्थकों को कमजोर कर सकता है, खासकर इसलिए कि पिछला चुनाव उसे नौ वर्षों की सैन्य-नेतृत्व वाली सरकार के विकल्प के रूप में पेश करता था—एक स्थिति जिसका वह इस बार प्रभावी ढंग से लाभ नहीं उठा पा रही।

बैंकॉक स्थित थाईलैंड फ्यूचर थिंक टैंक के सेंटर फॉर पॉलिटिक्स एंड जियोपॉलिटिक्स के निदेशक नापोन जातुस्रिपितक के अनुसार, कंबोडिया के साथ पिछले साल हुए सीमा संघर्षों के दौरान उभरी देशभक्ति की लहर से सेना की छवि मजबूत हुई है, जिससे सेना-विरोधी रुख राजनीतिक रूप से नुकसानदेह हो सकता है।

भूमजैथाई पार्टी का दबदबा

मौजूदा प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल के नेतृत्व वाली भूमजैथाई पार्टी को शाही-सैन्य प्रतिष्ठान का प्रमुख समर्थक और पसंदीदा दल माना जा रहा है।

अनुतिन पिछले सितंबर से ही प्रधानमंत्री हैं। इससे पहले वे पूर्व प्रधानमंत्री पेतोंगटार्न शिनावात्रा की कैबिनेट में थे, जिन्हें कंबोडिया से संबंधों के गलत प्रबंधन से जुड़े एक नैतिक उल्लंघन के कारण पद छोड़ना पड़ा। दिसंबर में अनुतिन ने संसद भंग कर नई चुनाव घोषणा की, जब उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का खतरा पैदा हुआ।

इसके बाद कंबोडिया के साथ सीमा झड़पों ने अनुतिन को खुद को ‘युद्धकालीन नेता’ के रूप में पेश करने का मौका दिया। बाढ़ और वित्तीय घोटालों के कारण उनकी लोकप्रियता में आई गिरावट के बाद यह उनके लिए राहत साबित हुआ। उनका चुनाव अभियान राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रोत्साहन पर केंद्रित है।

भूमजैथाई को अगली सरकार बनाने की सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। पार्टी पुराने ढंग की संरक्षक राजनीति और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में मजबूत जमीनी संगठन के जरिए फायदा उठाती है।

थाकसिन की राजनीतिक मशीन

फेउ थाई पार्टी, अरबपति पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा की नवीनतम राजनीतिक इकाई है। यह पार्टी अपनी पूर्ववर्ती थाई राक थाई पार्टी की लोकलुभावन नीतियों की विरासत पर सवार है, जिसने 2001 से 2006 तक शासन किया था, जब एक सैन्य तख्तापलट में उसे सत्ता से हटाया गया।

थाकसिन समर्थित दलों ने कई बार चुनावी वापसी की, लेकिन हर बार रूढ़िवादी अदालतों और सरकारी निगरानी संस्थाओं द्वारा हटाए गए। 2023 के चुनाव में पार्टी ने अपनी राजनीति को इतना नरम किया कि उसे अधिक प्रगतिशील मूव फॉरवर्ड पार्टी के मुकाबले स्वीकार्य विकल्प मानते हुए सत्ता में लौटने दिया गया।

इसके बावजूद रूढ़िवादी न्याय व्यवस्था ने उस पर भी कार्रवाई की—दो वर्षों में उसके दो प्रधानमंत्रियों को हटाया गया और थाकसिन को पुराने मामलों में जेल भेजा गया। अब पार्टी आर्थिक पुनरुद्धार और नकद सहायता जैसी लोकलुभावन घोषणाओं के साथ चुनाव लड़ रही है और थाकसिन के भतीजे योदचानन वोंगसावत को प्रधानमंत्री पद का प्रमुख उम्मीदवार बनाया है।

संविधान पर जनमत संग्रह

रविवार के मतदान में एक जनमत संग्रह भी शामिल है, जिसमें पूछा गया है कि क्या थाईलैंड को 2017 के सैन्य-निर्मित संविधान को बदलना चाहिए।

यह वोट किसी नए मसौदे पर नहीं, बल्कि इस बात पर है कि संसद को औपचारिक मसौदा प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति दी जाए या नहीं—जिसके लिए आगे कई चरणों से गुजरना होगा।

लोकतंत्र समर्थक समूह नए संविधान को सेना और न्यायपालिका जैसी गैर-निर्वाचित संस्थाओं के प्रभाव को कम करने की दिशा में अहम कदम मानते हैं, जबकि रूढ़िवादी इसे अस्थिरता का कारण बता रहे हैं।

(एपी)