दिल्ली अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल, सिसोदिया, के कविता सहित 20 अन्य को किया बरी

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image posted on Dec. 12, 2025, Aam Aadmi Party National Convener Arvind Kejriwal addresses a public meeting, at Velim village, in Goa. (@ArvindKejriwal/X via PTI Photo)(PTI12_12_2025_000310B)

नई दिल्ली, 27 फरवरी (पीटीआई) — आम आदमी पार्टी (आप) के शीर्ष नेतृत्व को बड़ी राहत देते हुए दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को राजनीतिक रूप से संवेदनशील आबकारी नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उनके पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया। अदालत ने उनके खिलाफ दायर सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया।

आरोपमुक्त किए गए लोगों में तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता भी शामिल हैं।

विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने जांच में खामियों को लेकर सीबीआई की आलोचना करते हुए कहा कि केजरीवाल के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है और सिसोदिया तथा अन्य आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता।

सीबीआई पूर्ववर्ती आप सरकार की अब रद्द की जा चुकी आबकारी नीति के निर्माण और क्रियान्वयन में कथित भ्रष्टाचार की जांच कर रही थी।

न्यायाधीश ने जिन बातों को “भ्रामक कथन” बताया, उनका उल्लेख करते हुए कहा कि विस्तृत चार्जशीट में कई ऐसी कमियां हैं, जिनका साक्ष्यों या गवाहों के बयानों से समर्थन नहीं होता।

उन्होंने कहा, “चार्जशीट में आंतरिक विरोधाभास हैं, जो साजिश के सिद्धांत की जड़ पर प्रहार करते हैं।”

अदालत ने कहा कि साक्ष्यों के अभाव में केजरीवाल के खिलाफ लगाए गए आरोप टिक नहीं सकते और उन्हें ठोस सामग्री के बिना ही आरोपित किया गया प्रतीत होता है। न्यायाधीश ने कहा कि ऐसा दृष्टिकोण विधि के शासन के अनुरूप नहीं है।

सिसोदिया के संबंध में अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सामग्री नहीं है, जो उनकी संलिप्तता दर्शाए, और न ही उनसे कोई बरामदगी हुई है।

अदालत ने यह भी कहा कि आबकारी नीति के संबंध में किसी व्यापक साजिश या आपराधिक मंशा का कोई प्रमाण नहीं मिला। अदालत ने कहा कि एजेंसी का मामला न्यायिक परीक्षण पर खरा नहीं उतरता, खासकर तब जब उसने मात्र अटकलों के आधार पर साजिश की कहानी गढ़ने की कोशिश की।

अदालत ने मामले को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी गवाह (एप्रूवर) के बयानों पर निर्भर रहने को लेकर भी एजेंसी की आलोचना की।

अदालत ने कहा, “यदि ऐसी प्रक्रिया की अनुमति दी जाती है तो यह संवैधानिक सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन होगा। किसी आरोपी को माफी देकर उसे एप्रूवर बनाना और फिर उसकी गवाही के जरिए जांच की कमियों को भरते हुए अन्य लोगों को आरोपी बनाना उचित नहीं है।”

अन्य आरोपमुक्त आरोपियों में कुलदीप सिंह, नरेंद्र सिंह, विजय नायर, अभिषेक बोइनपल्ली, अरुण रामचंद्र पिल्लई, मूथा गौतम, समीर महेंद्रू, अमनदीप सिंह ढल्ल, अर्जुन पांडेय, बुच्चीबाबू गोर्नाटला, राकेश जोशी, दामोदर प्रसाद शर्मा, प्रिंस कुमार, चनप्रीत सिंह रायत, अरविंद कुमार सिंह, दुर्गेश पाठक, अमित अरोड़ा, विनोद चौहान, आशीष माथुर और पी. सरथ चंद्र रेड्डी शामिल हैं। पीटीआई