नई दिल्ली, 13 मार्च (पीटीआई) — दिल्ली के मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) ने जनकपुरी में 2016 में स्कूटी की टक्कर से स्थायी न्यूरोलॉजिकल दिव्यांगता का शिकार हुई एक महिला को 60.95 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी Rakesh Kumar Singh, पूनम द्वारा दायर दावे की सुनवाई कर रहे थे। पूनम उस समय 17 वर्ष की थीं, जब दुर्घटना में उन्हें गंभीर सिर की चोटें आई थीं।
9 मार्च के आदेश में ट्रिब्यूनल ने कहा,
“घायल कभी भी सामान्य जीवन नहीं जी पाएगी और न ही वह अपने या अपने परिवार के लिए ठीक से सोच-समझकर निर्णय ले पाएगी। हालांकि, हम उसे कुछ आर्थिक सहारा दे सकते हैं ताकि वह अपनी कठिन परिस्थितियों में किसी तरह जीवनयापन कर सके।”
ट्रिब्यूनल ने पाया कि दुर्घटना स्कूटी चालक प्रमोद की लापरवाह और तेज ड्राइविंग के कारण हुई थी, जो उस समय नाबालिग था।
यह हादसा 2 सितंबर 2016 को हुआ था, जिसमें पूनम को गंभीर सिर की चोटें आईं। मेडिकल साक्ष्यों के अनुसार पीड़िता की कई न्यूरोसर्जरी हुईं और उसे 33 प्रतिशत स्थायी न्यूरोसाइकोलॉजिकल दिव्यांगता रह गई। चोट की प्रकृति और उसके जीवन व कमाई पर प्रभाव को देखते हुए ट्रिब्यूनल ने उसकी कार्यात्मक दिव्यांगता 50 प्रतिशत आंकी।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि पीड़िता को दीर्घकालिक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है और वह सामान्य जीवन नहीं जी पाएगी तथा स्वतंत्र रूप से कमाई करने में भी सक्षम नहीं होगी।
ट्रिब्यूनल ने कहा, “यह साबित होता है कि दुर्घटना दोषी वाहन की लापरवाह और लापरवाही से की गई ड्राइविंग के कारण हुई।”
इसके बाद न्यायाधिकरण ने विभिन्न मदों के तहत कुल 60.95 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
ट्रिब्यूनल ने यह भी नोट किया कि दुर्घटना के समय स्कूटी बीमित (insured) थी। इसलिए बीमा कंपनी को मुआवजे की राशि जमा करने का निर्देश दिया गया। साथ ही बताया गया कि चालक नाबालिग था और उसके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था।
बीमा कंपनी को 30 दिनों के भीतर यह राशि जमा करने का निर्देश दिया गया है।
(पीटीआई) SKM SKM MNK MNK

