दिल्ली में एंड-ऑफ-लाइफ वाहनों पर प्रतिबंध के चलते सेकेंड हैंड कारों की कीमतों में भारी गिरावट: व्यापार संगठन

नई दिल्ली, 4 जुलाई (पीटीआई) — राजधानी दिल्ली में सेकेंड हैंड कारों की कीमतों में हाल के दिनों में तेज गिरावट देखी गई है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के अनुसार, व्यापारियों ने 40 से 50 प्रतिशत तक दाम गिरने की बात कही है। CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने बताया कि ओवरएज वाहनों के बाजार पर इसका गहरा असर पड़ा है और लगभग 60 लाख वाहन इस गिरावट से प्रभावित हुए हैं।

गोयल ने कहा कि यह कीमतों में गिरावट एंड-ऑफ-लाइफ (EOL) वाहनों पर लगे प्रतिबंधों के कारण आई है, जिनकी उम्र दिल्ली में संचालन की निर्धारित सीमा से अधिक हो चुकी है। व्यापारियों को अब अपनी कारें बहुत कम दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने बताया, “पिछले पांच दिनों में सेकेंड हैंड कारों के दाम 40-50% तक गिर गए हैं। कारोबारी अब अपनी गाड़ियां उनकी मूल कीमत के एक-चौथाई पर बेचने को मजबूर हैं।”

दिल्ली की सेकेंड हैंड कारें आमतौर पर पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में बिकती हैं, लेकिन अब बाहरी राज्यों के खरीदार भी कड़ी मोलभाव कर रहे हैं। गोयल ने कहा, “पहले जो लग्जरी सेकेंड हैंड कारें 6-7 लाख रुपये में बिकती थीं, वे अब मुश्किल से 4-5 लाख में बिक रही हैं। बाहर के खरीदार दिल्ली के व्यापारियों की मजबूरी जानते हैं और उसी हिसाब से सौदेबाजी कर रहे हैं।”

दिल्ली के करोल बाग, प्रीत विहार, पीतमपुरा और मोती नगर जैसे इलाकों में 1,000 से ज्यादा व्यापारी सेकेंड हैंड वाहनों के कारोबार में लगे हैं। व्यापारियों ने दूसरी राज्यों में गाड़ियां बेचने के लिए ट्रांसपोर्ट विभाग से एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) मिलने में भी दिक्कतों की बात कही है।

दिल्ली सरकार ने कोर्ट के आदेश के बाद 1 जुलाई से 10 साल या उससे पुराने डीजल वाहनों और 15 साल या उससे पुराने पेट्रोल वाहनों के संचालन और ईंधन भरवाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि, सरकार ने गुरुवार को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) से इस प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से रोकने का अनुरोध किया है, क्योंकि तकनीकी चुनौतियों के चलते ओवरएज वाहनों पर ईंधन प्रतिबंध व्यावहारिक नहीं है।