दिल्ली सरकार ने यमुना बाढ़ क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के लिए नवंबर तक की डेडलाइन तय की

नई दिल्ली, 5 जुलाई (पीटीआई) — दिल्ली सरकार ने यमुना नदी की सफाई और पुनर्जीवन के लिए तैयार 45 बिंदुओं वाले एक्शन प्लान के तहत सभी एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे नवंबर तक यमुना के बाढ़ क्षेत्र (फ्लडप्लेन) से सभी प्रकार के अतिक्रमण हटा दें। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा अनुमोदित इस योजना पर हाल ही में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में चर्चा की गई। इसमें दिल्ली जल बोर्ड (DJB), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC), दिल्ली नगर निगम (MCD), सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (I&FC) और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) जैसे प्रमुख विभागों और एजेंसियों को शामिल किया गया है।

योजना के अनुसार, डी.डी.ए. को निर्देश दिया गया है कि वह यमुना के बाढ़ क्षेत्र में जहां भी आवश्यक हो, नवंबर तक अतिक्रमण हटाना सुनिश्चित करे। पिछले वर्षों में एजेंसी ने नदी के किनारे अवैध नर्सरी और अन्य गैरकानूनी ढांचों के खिलाफ कार्रवाई की है।

अधिकारियों के मुताबिक, पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के बाढ़ क्षेत्र में कचरा फेंकना, अवैध बस्तियां और गैरकानूनी खेती जैसी अतिक्रमण की घटनाएं आम हैं। हाल के वर्षों में डी.डी.ए. ने 224 एकड़ बाढ़ क्षेत्र की जमीन को पुनः प्राप्त कर पूर्वी दिल्ली में असीता जैसे सार्वजनिक हरित क्षेत्र विकसित किए हैं।

डी.डी.ए. ने अप्रैल में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को बताया था कि उसने वज़ीराबाद बैराज और आईएसबीटी कश्मीरी गेट के बीच यमुना वनस्थली परियोजना के तहत 24 एकड़ भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। हालांकि, अधिकारियों ने माना कि अतिक्रमण विरोधी अभियान अक्सर कब्जाधारियों के विरोध और बाढ़ क्षेत्र की स्पष्ट सीमांकन की कमी के कारण बाधित होते हैं।

पिछले साल डी.डी.ए. के एक सर्वे में दावा किया गया था कि दिल्ली में यमुना के दो-तिहाई बाढ़ क्षेत्र पर हाल के वर्षों में अतिक्रमण हो चुका है।

एक्शन प्लान में यह भी निर्देश है कि यमुना में गिरने वाले सभी नालों से भी अतिक्रमण हटाया जाए। एमसीडी, एनडीएमसी और डी.डी.ए. को सभी स्टॉर्म वॉटर ड्रेनों से अतिक्रमण हटाने का जिम्मा सौंपा गया है, वहीं एमसीडी और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग को ड्रेन के किनारे अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी दी गई है।

यमुना पुनर्जीवन से जुड़े सभी पुराने और नए प्रोजेक्ट्स को दस कार्यशील प्रमुखों के तहत समेकित किया गया है, जिनमें ड्रेन, सीवेज, ठोस कचरा प्रबंधन, पारिस्थितिकीय प्रवाह वृद्धि और प्रवर्तन जैसे विषय शामिल हैं, और इन सभी के लिए समयसीमा निर्धारित की गई है।

यमुना दिल्ली में 52 किमी बहती है, जिसमें वज़ीराबाद से ओखला तक का 22 किमी हिस्सा सबसे ज्यादा प्रदूषित है और यही योजना और नीति का मुख्य फोकस है।

यमुना की सफाई भाजपा सरकार की प्रमुख प्रतिबद्धता है। अपने पहले बजट में सरकार ने जल और सीवरेज क्षेत्र के लिए 9,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

PTI VIT APL APL OZ OZ