
नई दिल्ली, 30 जनवरी (पीटीआई) — दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) में रिक्तियों के कारण उसके “गैर-कार्यात्मक” होने पर चिंता जताई और केंद्र सरकार से पूछा कि आयोग में सभी पद कब तक भरे जाएंगे।
एनसीएम में रिक्तियों के मुद्दे पर याचिकाकर्ता मुजाहिद नफीस द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि यह आयोग एक वैधानिक निकाय है, जिसमें पिछले साल अप्रैल से न तो अध्यक्ष है और न ही कोई सदस्य।
न्यायालय ने केंद्र से रिक्तियां भरने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण देते हुए एक हलफनामा दाखिल करने को कहा और केंद्र के वकील से सवाल किया कि इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए छह महीने और मांगना क्या उचित है।
मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय ने टिप्पणी की, “इसे (आयोग के गठन को) अलमारी में रख दीजिए। एक साल बाद (आप) फिर छह महीने मांग रहे हैं।”
अदालत ने कहा कि कानून के तहत केवल रिक्त पदों पर नामांकन करना आवश्यक है और इसके लिए किसी औपचारिक “चयन प्रक्रिया” की जरूरत नहीं है।
अदालत ने कहा, “संसद के एक अधिनियम के तहत कुछ दायित्वों के साथ एक वैधानिक निकाय गठित किया गया है। आयोग को चालू और कार्यरत रखना आपका संसदीय दायित्व है। तीन सदस्य दिसंबर 2024 में सेवानिवृत्त हुए। उपाध्यक्ष नवंबर 2024 में सेवानिवृत्त हुए। अध्यक्ष भी अप्रैल 2025 में सेवानिवृत्त हो गए। दिसंबर 2024 से अब तक कितना समय बीत चुका है? जब हम पूछते हैं कि आपको कितना समय लगेगा, तो आप छह महीने कहते हैं। क्या यह उचित है?”
केंद्र के वकील ने कहा कि रिक्तियां भरने के लिए नामांकन की प्रक्रिया जारी है और इसे पूरा करने में छह महीने और लगेंगे।
न्यायालय ने कहा कि आयोग अल्पसंख्यकों के विकास और कल्याण के लिए कार्य करता है और यह अपेक्षित था कि प्राधिकरण लंबे समय से चली आ रही रिक्तियों को भर चुके होते, जिनके कारण आयोग गैर-कार्यात्मक हो गया है।
अदालत ने कहा, “अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों के पद रिक्त होने के कारण आयोग इस समय गैर-कार्यात्मक प्रतीत हो रहा है, जो चिंता का विषय है।”
अदालत ने आदेश दिया, “उपरोक्त के मद्देनज़र, हम प्रतिवादी को निर्देश देते हैं कि वह आयोग में रिक्तियां भरने के लिए उठाए गए कदमों और इस प्रक्रिया को पूरा करने में लगने वाले संभावित समय का विवरण देते हुए हलफनामा दाखिल करे।”
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वर्तमान याचिका इस मुद्दे पर चल रही मुकदमेबाजी का “दूसरा चरण” है।
उन्होंने कहा कि पहले की याचिका में रिक्तियों के लिए कोविड-19 और लॉकडाउन को “बहाना” बनाया गया था, लेकिन इस बार ऐसा कोई बहाना नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि उपाध्यक्ष के नवंबर 2024 में पद छोड़ने और सदस्यों का कार्यकाल दिसंबर 2024 में समाप्त होने के बाद, अध्यक्ष अप्रैल 2025 तक आयोग का संचालन करते रहे, जब उनका कार्यकाल भी समाप्त हो गया।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगले शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध की।
नफीस, जो स्वयं को माइनॉरिटी कोऑर्डिनेशन कमेटी का संयोजक बताते हैं, ने आरोप लगाया है कि एनसीएम को पूरी तरह और व्यवस्थित रूप से निष्क्रिय किया जाना केंद्र द्वारा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सभी पांच सदस्यों की नियुक्ति में घोर विफलता का परिणाम है।
याचिका में कहा गया है, “इस कार्यकारी लापरवाही ने संसद के एक अधिनियम के तहत भारत के अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के संरक्षण और कल्याण के लिए गठित एक महत्वपूर्ण वैधानिक निकाय को पूरी तरह निष्क्रिय और नेतृत्वहीन बना दिया है।”
याचिका में केंद्र सरकार को, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के माध्यम से, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम के अनुरूप अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया तत्काल शुरू कर उसे पूरा करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
साथ ही, नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से, अधिमानतः अदालत के आदेश की तारीख से चार सप्ताह के भीतर पूरा करने की भी मांग की गई है। पीटीआई ADS RC
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