नई दिल्ली, 26 सितंबर (पीटीआई) दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को आईआरएस अधिकारी और पूर्व एनसीबी जोनल निदेशक समीर वानखेड़े से अभिनेता शाहरुख खान और उनकी पत्नी गौरी खान के स्वामित्व वाली रेड चिलीज एंटरटेनमेंट और नेटफ्लिक्स के खिलाफ उनकी मानहानि याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल किया। यह याचिका उनकी प्रतिष्ठा को कथित तौर पर उनके वेब सीरीज ‘द बैस्टर्ड्स ऑफ बॉलीवुड’ में नुकसान पहुँचाने के आरोप पर दायर की गई है।
न्यायमूर्ति पुरुषैंद्र कुमार कौरव ने वानखेड़े के वकील से पूछा कि यह याचिका दिल्ली में कैसे स्वीकार्य है।
वानखेड़े के पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी ने कहा कि वेब सीरीज का प्रसारण दिल्ली समेत कई शहरों में होता है और अधिकारी की यहां मानहानि हुई है। उन्होंने कहा कि वे याचिका में आवश्यक संशोधन करेंगे।
न्यायालय ने संशोधित आवेदन दायर करने के लिए उन्हें समय दिया, जिसके बाद मामले की सुनवाई होगी।
वानखेड़े की याचिका में रेड चिलीज एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड, नेटफ्लिक्स और अन्य के खिलाफ स्थायी और अनिवार्य निषेधाज्ञा, घोषणा और मुआवजे की मांग की गई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह एक “झूठा, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक वीडियो” है, जिसे प्रोडक्शन हाउस ने बनाया और नेटफ्लिक्स ने अपने टेलीविजन सीरीज के हिस्से के रूप में प्रसारित किया है।
वानखेड़े ने 2 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है, जो वे टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल को कैंसर रोगियों के लिए दान करना चाहते हैं।
याचिका में कहा गया है, “यह सीरीज ड्रग विरोधी एजेंसियों की गलत और नकारात्मक छवि प्रस्तुत करती है, जिससे कानून प्रवर्तन संस्थाओं में जनता का विश्वास कम होता है।”
याचिका में यह भी कहा गया है कि यह सीरीज जानबूझकर समीर वानखेड़े की प्रतिष्ठा को रंगीन और पक्षपाती तरीके से नुकसान पहुँचाने के इरादे से बनाई गई है, खासकर तब जब अधिकारी और शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान से जुड़ा मामला बॉम्बे हाईकोर्ट और मुंबई के एनडीपीएस विशेष न्यायालय में लंबित है।
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